Delhi New CM: दिल्ली की सभी 10 जाट-बहुल सीटों पर क्यों हारी 'आप'? BJP के पक्ष में हवा बनने की 5 बड़ी वजह
Delhi New CM News: दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान 'आप' सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने जाट वोट बैंक को बीजेपी से दूर करने के लिए बहुत बड़ा दांव खेला था। उन्होंने मोदी सरकार से इन्हें सेंट्रल ओबीसी लिस्ट में डालने की वकालत की थी, ताकि इस समुदाय के युवाओं को केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में फायदा मिले। लेकिन, दिल्ली के जाटों ने अपनी प्रभाव वाली सभी 10 सीटें एक मुश्त बीजेपी की झोली में डाल दीं। इसकी मुख्य रूप से 5 वजहें नजर आ रही हैं।
दिल्ली में जाटों ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) का बढ़ चढ़कर समर्थन किया था। लेकिन, इस बार लगता है कि उन्होंने पूरी तरह से केजरीवाल और उनकी पार्टी से मुंह मोड़ लिया। इसके पीछे बीजेपी की सधी हुई रणनीति और 'आप'के खिलाफ जबरदस्त एंटी-इंकंबेंसी ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

Delhi New CM: जाट बहुल इलाकों में कैसे बनी बीजेपी के पक्ष में हवा?
टीओआई ने बीजेपी के कुछ पदाधिकारियों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट दी है, जिसमें कई ऐसे फैक्टर बताए गए हैं, जिनके चलते इस बार जाट पूरी तरह से 'कमल' खिलाने के लिए मशरूफ नजर आए। मसलन, एक वरिष्ठ भाजपा ने बताया कि जाट इलाकों में कई तरह की समस्याएं थीं। 'डीडीए और लेफ्टिनेंट गवर्नर की सहायता से कुछ काम करवाए गए। जाटों को यह महसूस हुआ कि केंद्र सरकार की सहायता ने ही उनके विकास में अहम भूमिका निभाई है, जो कि हो नहीं पा रहा था।'
Delhi New CM News: जाट नेताओं पर भाजपा की ओर से पूरा भरोसा दिखाया जाना
इस चुनाव में बीजेपी ने जाट नेताओं को टिकट देने में भी दरियादिली दिखाई। पार्टी को इसका भी फायदा हुआ, क्योंकि 'आप' या कांग्रेस इसमें पिछड़ते नजर आए। खासकर प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल के खिलाफ उतारने के आइडिया ने बहुत काम किया। इससे युवाओं ने बीजेपी की ओर रुख कर लिया।
बाहरी दिल्ली में भाजपा ने जो क्लीन स्वीप किया है,उसमें इसका बहुत बड़ा रोल है। यह इलाका कभी प्रवेश वर्मा के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा का गढ़ हुआ करता था।
लाडो सराय के परमजीत सेजवाल का कहना है, 'बीजेपी को फायदा मिलने की कई वजहें हैं। इनमें विकास का काम नहीं होना और जो इंफ्रास्ट्रक्चर है, उसकी खस्ताहाली भी है। दूसरी बात कि बिरादरी ने देखा कि कैलाश गहलोत जैसे नेता निकल रहे हैं। इंडिया ब्लॉक ने जाट समुदाय के लोगों को टिकट भी नहीं दिया। इन वजहों से एक माहौल बनना शुरू हो गया।'
Delhi BJP CM Candidate: प्रवेश वर्मा पर केजरीवाल का निजी हमले ने 'आप' की खाट खड़ी करने में बड़ी भूमिका निभाई
एक बीजेपी नेता ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले अपने एनजीओ के माध्यम से महिलाओं को पैसे देने पर जिस तरह से अरविंद केजरीवाल ने प्रवेश वर्मा को 'देशद्रोही'कह दिया, इससे 'आप'को और नुकसान हो गया। उनके मुताबिक, 'जब केजरीवाल ने प्रेस के माध्यम से प्रवेश वर्मा पर निजी हमले शुरू किए, उन्होंने इसे जाटों का मुद्दा भी बना दिया।'
Delhi New CM: जाटों को ओबीसी आरक्षण वाला 'आप' का दांव फेल हो गया
इस चुनाव में जाटों के दिग्गजों को उतारने से बीजेपी को कई मोर्चे पर फायदा मिला। जैसे केजरीवाल ने चुनाव के बीच में ही जाटों के आरक्षण वाला दांव चल दिया था। लेकिन, इस बिरादरी से आने वाले जाट नेताओं ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया और यह बात रखना शुरू किया कि अगर 'आप' गंभीर होती तो उसे इस प्रस्ताव को विधानसभा में लाना चाहिए थे, लेकिन सत्ता में रहकर भी उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया। भाजपा नेता के मुताबिक, इससे केजरीवाल की रणनीति की हवा निकल गई।
Delhi New CM:'आप' सरकार से जाटों में असंतोष
दिल्ली में चुनाव से कुछ दिन पहले ही राजधानी के सभी 360 गांवों के प्रतिनिधियों ने बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। यह घोषणा इस वजह से की गई कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में दिल्ली सरकार से अनेकों मुद्दों पर असंतोष मौजूद था। इसी का परिणाम है कि भारतीय जनता पार्टी मेहरौली, नजफगढ़, बिजवासन, पालम, नांगलोई जाट, नरेला, रिठाला, मुंडका,विकासपुरी और मटियाला जैसी सभी सीटें जीत गई।












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