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Delhi: दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा लश्कर आतंकी शबीर अहमद लोन, स्पेशल सेल ने कैसे किया गिरफ्तार?

LeT handler Shabir Ahmed Arrest: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कथित आतंकी शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार कर लिया है। शब्बीर पर दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर देश विरोधी पोस्टर चिपकाने वाले 'लश्कर मॉड्यूल' का हैंडलर होने का आरोप है।

पुलिस लंबे समय से इसकी तलाश में थी, जिसका नाम फरवरी में हुए 'मल्टी-स्टेट काउंटर-टेरर ऑपरेशन' के दौरान सामने आया था।

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मूल रूप से जम्मू-कश्मीर का रहने वाला शब्बीर अहमद लोन कथित तौर पर बांग्लादेश में बैठकर भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रच रहा था। जानें दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने कैसे इसका भांड़ा फोड़ा...

क्या था दिल्ली मेट्रो पोस्टर कांड?

इस मामले की शुरुआत 8 फरवरी, 2026 को हुई थी, जब दिल्ली के 'सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन' पर तैनात CISF के शिफ्ट इंचार्ज ने एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस के अनुसार जनपथ मेट्रो स्टेशन पर पाकिस्तान समर्थक और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पोस्टर चिपकाए गए थे।

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जांच के दौरान, इसी तरह के पोस्टर राष्ट्रीय राजधानी के कई अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी पाए गए। इन पोस्टरों पर मारे गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी बुरहान वानी की तस्वीरें थीं। साथ ही India Stop Genocide & Free Kashmir और उर्दू में 'हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है' जैसे भड़काऊ नारे लिखे थे।

Delhi Metro Poster Case में कैसे हुआ इस बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़?

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्पेशल सेल को सौंपा गया। जांच के दौरान पता चला कि इस साजिश के पीछे पूरी तरह से रेडिकलाइज्ड (कट्टरपंथी) गुर्गों का एक नेटवर्क काम कर रहा था। 15 फरवरी को कोलकाता के माझरपाड़ा में छापेमारी कर पुलिस ने उमर फारूक और रबीउल इस्लाम (बांग्लादेशी नागरिक) को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद पुलिस तमिलनाडु के तिरुप्पुर पहुंची, जहां 21 फरवरी को 6 और बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा गया।

ये सभी फर्जी पहचान पत्र बनाकर भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी उमर फारूक मार्च 2025 में शब्बीर अहमद लोन के संपर्क में आया था, जिसने उसे भारत में लश्कर के ऑपरेशनों को लीड करने के लिए तैयार किया था।

क्या दिल्ली में आतंकी हमले की थी साजिश?

स्पेशल सेल के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा के अनुसार, शब्बीर अहमद लोन का प्लान बेहद खतरनाक था। वह उन बांग्लादेशी नागरिकों का इस्तेमाल करना चाहता था जो भारतीय पहचान अपना चुके थे ताकि किसी का शक न जाए। दिसंबर 2025 में उमर फारूक को दिल्ली के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी करने और मूल्यांकन के लिए वीडियो भेजने का निर्देश दिया गया था। इन पोस्टरों का मकसद दिल्ली में डर फैलाना और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलना था।

पुलिस ने इस मामले में 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 152 (देशद्रोह से जुड़े कृत्य), 196 और 197 के साथ-साथ दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम (DPDP Act) की धारा 3 के तहत FIR दर्ज की है। शब्बीर अहमद लोन की गिरफ्तारी से अब लश्कर के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कई और राज खुलने की उम्मीद है।

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