Delhi Liquor Policy: चुनाव से पहले केजरीवाल की बढ़ी मुश्किलें! केंद्र से मुकदमे की मंजूरी, ED ने लगाए 5 आरोप
Delhi Liquor Policy Case: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अब रद्द हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
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यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 6 नवंबर 2024 के आदेश के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी को आरोप तय करने से पहले केंद्र से पूर्व अनुमति लेनी होगी। इससे पहले, दिल्ली की एक अदालत में केजरीवाल के खिलाफ मामला मंजूरी के अभाव में लंबित था। उधर, केजरीवाल ने हाथ जोड़ लिए और कहा कि ऊपर वाला ही बचाएगा।

केजरीवाल पर ईडी के ये 5 आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने शराब कारोबारियों से ₹100 करोड़ की रिश्वत ली, जिसमें से ₹45 करोड़ आप (आम आदमी पार्टी) के गोवा चुनाव अभियान में इस्तेमाल किए गए।
मुख्य आरोप:
- नीति निर्माण में भूमिका: ईडी के अनुसार, केजरीवाल नीति निर्माण के हर निर्णय में शामिल थे और उन्होंने कथित तौर पर रिश्वत मांगी।
- रिश्वत की मांग: ईडी ने दावा किया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और विजय नायर ने चुनावी फंडिंग के लिए शराब व्यापारियों से अतिरिक्त धन जुटाया।
- अनियमितताओं का सरगना: केजरीवाल को "नीति के पीछे का मास्टरमाइंड" बताया गया।
- गोवा चुनाव के लिए धन: ईडी ने कहा कि विनोद चौहान के माध्यम से रिश्वत की राशि दिल्ली से गोवा तक ट्रांसफर की गई।
- ₹1,100 करोड़ की पहचान: ईडी ने कहा कि ₹1,100 करोड़ की अपराध से अर्जित आय की पहचान की गई है।
ईडी का कदम और जांच का दायरा
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पहले ही ईडी को केजरीवाल के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
सीबीआई ने अगस्त 2024 में समानांतर भ्रष्टाचार मामले में मंजूरी प्राप्त की।
ईडी ने 17 मई 2024 को चार्जशीट दाखिल की और केजरीवाल को आप की गतिविधियों और फंडिंग का जिम्मेदार ठहराया।
क्या है केजरीवाल का पक्ष?
केजरीवाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि उनकी पार्टी को बदनाम करने के लिए इस तरह की कार्रवाइयों का सहारा लिया जा रहा है।
मामले का राजनीतिक और कानूनी प्रभाव
- आम आदमी पार्टी की छवि: यह मामला आप और उसके नेताओं की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
- राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: भाजपा और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर सियासी तकरार बढ़ सकती है।
- आने वाले चुनावों पर असर: आरोपों के चलते आप की विश्वसनीयता और केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी और ईडी की जांच से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज होने की संभावना है।
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