सेलिब्रिटी के नाम -तस्वीरों का इस्तेमाल करना 'निजता के अधिकार' का उल्लंघन नहीं, दिल्ली HC ने क्यों कहा ऐसा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के पहलू भी देखा जाए तो सेलिब्रिटी के नामों और तस्वीरों का इस्तेमाल कर उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं होगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी सेलेब्रिटी के नाम और उनकी तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करना, उनकी 'निजता के अधिकार' का उल्लंघन नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 26 अप्रैल को एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, कलात्मकता, पैरोडी, समाचार, संगीत के लिए अभिव्यक्ति की आजादी के तहत किसी भी मशहूर हस्तियों के नाम-तस्वीरों का इस्तेमाल करने से 'निजता के अधिकार' का उल्लंघन नहीं होता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी मशहूर हस्ती के नाम और उनके फोटो का इस्तेमाल समाचार, व्यंग्य, पैरोडी और कला के लिए किया जा सकता है। यह संविधान के तहत दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत मान्य है और इसे किसी के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
हालांकि कोर्ट ने इसके साथ ये भी स्पष्ट किया कि बिनी उनकी इजाजत के उनकी पहचान उजागर करना या उनकी तस्वीरों-वीडियो का इस्तेमाल कर किसी प्रोडक्ट, ब्रांड या सामान की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए भी नहीं किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा, ''मेरी राय में, लैंपूनिंग, व्यंग्य, पैरोडी, कला, छात्रवृत्ति, संगीत, शिक्षाविदों, समाचार और इसी तरह के अन्य उपयोगों के लिए सेलिब्रिटी के नाम, तस्वीरों-वीडियो का इस्तेमाल संविधान के तहत दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के रूप में किया जा सकता है। लेकिन उसका उपयोग अपने प्रोडक्ट के प्रमोशन और बिक्री के लिए किया जाना गलत है।''
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी सिंगापुर के डिजिटल कलेक्टिबल्स नाम की एक कंपनी और मोहम्मद सिराज और अशर्दीप सिंह जैसे कुछ क्रिकेटरों की याचिकाओं पर किया। दिल्ली हाई कोर्ट ने ड्रीम 11 की सहायक कंपनी और सिंगापुर स्थित इकाई डिजिटल कलेक्टिबल्स पीटीई लिमिटेड (PTE Limited) को मोबाइल प्रीमियर लीग (एमपीएल) और एक एप्लिकेशन स्ट्राइकर के खिलाफ अपने मुकदमे में अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है।
डिजिटल कलेक्टिबल्स दुनिया भर में और भारत में ट्रेड नाम रेरियो (RARIO) के तहत अपना कारोबार करती है।












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