8 महीने की गर्भवती ने एक्सीडेंट में तोड़ा दम, दिल्ली HC ने 2.5 लाख से 5 लाख रुपये बढ़ाई मुआवजे की राशि
Delhi HC Grand 5 lakh compensation: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसे मामले में शख्स को पांच लाख मुआवजा देने का ऐलान किया, जिसमें उसकी 8 माह की गर्भवती पत्नी की एक्सीडेंट में जान चली गई थी। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला के गर्भ में पल रहा वो भ्रूण भी मुआवजे का हकदार है, जिसकी एक्सीडेंट में जान चली गई।
'महिला के अंदर एक और जीवन': HC
अपनी जान गंवाने वाली महिला उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात थी। इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस नवीन चावला ने कहा कि भ्रूण एक महिला के अंदर एक और जीवन होता है। ऐसे में इसे गंवाने का मतलब जन्म लेने वाली संतान को खो देना है।

2013 में हादसे में हुई मौत
बताते चलें कि साल 2013 में जुलाई के महीने में एक तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी थी। इस मोटरसाइकिल में 8 महीने की गर्भवती महिला समेत एक अन्य महिला, जो महिला की सहकर्मी थी, वो भी सवार थी। पिछली सीट पर बैठी गर्भवती महिला की इस हादसे में मौत हो गई। इसके बाद पति ने मुआवजे की मांग करते हुए कोर्ट के चक्कर काटे।
'2.5 लाख रुपये नहीं हैं पर्याप्त'
मामले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने शख्स को बतौर मुआवजा 2.5 लाख रुपये देने का ऐलान किया था। लेकिन कोर्ट ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए पांच लाख मुआवजे का ऐलान किया है। न्यायाधीश ने कहा कि एक्सीडेंट में मरने वाली गर्भवती महिला का पति उचित मुआवजे का हकदार है और ऐसे में बीमाकर्ता द्वारा मुआवजे की बढ़ाई गई राशि के तौर पर पांच लाख रुपये की रकम अदा की जानी चाहिए।












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