सरकारी वकीलों के चयन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का एलजी और केंद्र को नोटिस, केजरीवाल सरकार ने दी है चुनौती
नई दिल्ली, 27 अगस्त: दिल्ली उच्च न्यायालय ने विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) के चयन को लेकर केजरीवाल सरकार की ओर से दी गई अर्जी पर सुनवाई करते हुए उपराज्यपाल अनिल बैजल और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। दिल्ली की सीएम केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने इस साल गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर हुई हिंसा और पिछले साल के उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों के केस में पुलिस की ओर से चुने गए वकीलों को विशेष लोक अभियोजक के रूप में अनुमति देने के उपराज्यपाल अनिल बैजल फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जिस पर शुक्रवार को अदालत ने केंद्र और उपराज्यपाल से जवाब मांगा है।

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने उपराज्यपाल को याचिका के साथ-साथ ही इस फैसले पर रोक लगाने के आवेदन पर भी अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। हाईकोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है।
आप सरकार ने दी है अर्जी
दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने उपराज्यपाल के उस फैसले चुनौती दी है जिसमे उन्होंने इस साल 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा और बीते साल फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस के चुने गए वकीलों को विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त करने की अनुमति दी है। याचिका में कहा गया है कि इन एसपीपी को दिल्ली पुलिस ने चुना है और इसलिए यह हितों के गंभीर टकराव का मामला है। ऐसे में इनको उपराज्यपाल की ओर से इजाजत मिलना गलत है।
दिल्ली सरकार की ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी और राहुल मेहरा दिल्ली हाईकोर्ट में पक्ष रखा। कोर्ट में सिंघवी ने कहा कि दिल्ली सरकार की ओर से नियुक्त एसपीपी का मामले से कोई नाता नहीं था लेकिन यहां ऐसा नहीं है। क्या उनको एसपीपी बनाया जा सकता है, जो जांच शाखा यानी दिल्ली पुलिस का हिस्सा है।












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