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कपिल मिश्रा के आचार संहिता उलंघन केस की सुनवाई टली, दिल्ली HC ने ट्रायल कोर्ट को दिया ये निर्देश

Delhi HC Kapil Mishra Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 29 अगस्त को एक अहम आदेश पारित करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) के खिलाफ चल रही कार्यवाही को अभी टाल दे। यह मामला मिश्रा के उन कथित भड़काऊ बयानों से जुड़ा है, जो उन्होंने वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों से पहले दिए थे और जिन पर राजनीतिक विवाद भी गहराया था।

अदालत ने कहा कि जब तक दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में शामिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से प्राप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक ट्रायल कोर्ट सुनवाई आगे न बढ़ाए।

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हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। गौरतलब है कि कपिल मिश्रा पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और धार्मिक आधार पर वैमनस्य फैलाने का आरोप लगाया गया है, जिसे लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

जस्टिस रविंदर दूडेजा की बेंच ने यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान कपिल मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि दिल्ली पुलिस ने अपनी पूरक चार्जशीट में प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) से प्राप्त कुछ फाइलें शामिल की हैं, लेकिन वे फाइलें कोडेड और अपठनीय (incomprehensible) फॉर्मेट में हैं। ऐसे में जब तक अभियोजन पक्ष इन दस्तावेजों को पठनीय रूप में उपलब्ध नहीं कराता, तब तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकती।

ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक की मांग

जेठमलानी ने अदालत से यह भी कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट कार्यवाही को जारी रखता है, तो उनके द्वारा दाखिल अपील बेमानी (infructuous) हो जाएगी। गौरतलब है कि कपिल मिश्रा ने सिटी कोर्ट के 7 मार्च के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी कार्यवाही और समन को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश में क्या है?

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि आज समय की कमी के कारण इस याचिका पर विस्तार से सुनवाई संभव नहीं है। इसलिए ट्रायल कोर्ट से अनुरोध है कि वह आरोप तय करने की सुनवाई को हाईकोर्ट द्वारा तय की गई अगली तारीख के बाद के लिए टाल दे। इस तरह अब कपिल मिश्रा के मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

Kapil Mishra Case: पूरा मामला क्या है?

कपिल मिश्रा के खिलाफ यह केस 24 जनवरी 2020 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि मिश्रा ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट कर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल (RP) एक्ट का उल्लंघन किया। पुलिस का कहना था कि उनके बयान धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने की कोशिश थे।

ट्रायल कोर्ट ने 7 मार्च को अपने आदेश में कहा था कि मिश्रा के कथित बयान "धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने का खुला प्रयास" प्रतीत होते हैं। अदालत ने इस आधार पर कार्यवाही खत्म करने से इनकार कर दिया था।

मिश्रा की दलील

हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कपिल मिश्रा ने कहा कि उनके बयान न तो किसी जाति, धर्म या समुदाय के खिलाफ थे और न ही वैमनस्य फैलाने के लिए दिए गए थे। उन्होंने कहा कि उनके ट्वीट्स में केवल पाकिस्तान और शाहीन बाग का जिक्र था और उनका मकसद केवल सीएए (CAA) विरोधी आंदोलन और उसमें शामिल असामाजिक तत्वों की आलोचना करना था। उनका कहना था कि उस दौरान दिए गए बयान से न तो कोई हिंसा हुई और न ही किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैली।

दिल्ली पुलिस ने अब तक क्या-क्या किया?

दिल्ली पुलिस ने मिश्रा की दलीलों का विरोध करते हुए कहा था कि मिश्रा के ट्वीट्स में सीएए का जिक्र नहीं था, बल्कि उनका मकसद दो धार्मिक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाना था। इससे पहले 18 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि इस कार्यवाही को जारी रखने से मिश्रा को कोई नुकसान नहीं होगा।

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