दिल्ली सरकार का सोलर एनर्जी प्लान, 2025 तक खत्म होगी बिजली आपूर्ति की टेंशन

दिल्ली सरकार अगले दो साल के भीतर राज्य में बिजली आपूर्ति की समस्या दूर करने की ठोस योजना लाई है। जिसके तहत साल 2025 तक राज्य में बड़े पैमाने में सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

Arvind Kejriwal

दिल्ली जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में सरकार ने भविष्य के ऊर्जा संकट से बचने के लिए बड़े स्तर पर प्लान किया है। जिसके तहत सौर ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक योजना तैयार की गई है। दिल्ली सरकार ने पिछले साल सोलर एनर्जी नीति के मसौदे को हरी झंडी दी थी। जिसका लक्ष्य दिल्ली में साल 2025 तक 6, 000 मेगावाट की क्षमता तक उत्पादन का लक्ष्य है। अब सवाल है कि इतने बड़े लक्ष्य को पूरा करने का दिल्ली सरकार का प्लान क्या है। सरकार के मसौदे से ही ये बात स्पष्ट हो जाती है। गुजरात के मोढेरा गांव से बढ़कर यहां प्लान तैयार है। लक्ष्य भी बड़ा है लेकिन पूरा करने के लिए वक्त भी दो साल का है।

ऊर्जा उत्पादन के साथ रोजगार भी
दिल्ली सरकार सौर ऊर्जा उत्पादन को लेकर ठोस नीति लाई है, जो भारत के अन्य राज्यों की तुलना में कई गुना बेहतर साबित हो सकती है। सरकार की मंजूरी के बाद पिछले दिनों दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने नई सोलर एनर्जी नीति को लेकर कही अहम बातें भी कहीं थीं। सोलर एनर्जी नीति के तहत दिल्ली में आवासीय और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। ये व्यवस्था उत्पादन आधारित पूंजीगत सब्सिडी की है। इस नीति का उद्देश्य क्लीन एनर्जी के रूप में सौर ऊर्जा की खपत बढाना है। इससे साथ दिल्ली में 12,000 से अधिक हरित रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है।

सौर ऊर्जा के लिए ठोस प्लान
मौजूदा समय में राज्य में बिजली की मांग में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी महज 9 प्रतिशत है। लेकिन अब दिल्ली सरकार नई सोलर एनर्जी नीति के तहत अगले 3 सालों में वार्षिक बिजली मांग में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 25 फीसदी तक बढ़ाने के लक्ष्य है। इसके लिए दिल्ली सरकार उपभोक्ताओं को कम्युनिटी सोलर और पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग का भी मौका देगी। ऐसा पहली बार हो रहा जब रूफटॉप के इस तरह के प्रयोग को बढ़ावा देने का सरकार ने नीति तैयार की है। जिसके तहत मासिक उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (GBI) की योजना है। ये योजना दिल्ली में आवासीय, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, आरडब्ल्यूए, वाणिज्यिक और औद्योगिक (C&I) उपभोक्ताओं के लिए है।

पांच साल तक मिलेगा मासिक GBI
भवनों को सोलर सिस्टम चालू होने के दिन से ही शुरू हो जाएगा। शर्तों के मुताबिक परिचालन अवधि कम से कम पांच साल होनी चाहिए। दिल्ली सरकार घरों पर लगे 3 kWh तक के सोलर सिस्टम के लिए 3 रुपये/kWh, 3 kW से ऊपर और 10 kW तक के आवासीय सोलर सिस्टम के लिए 2 रुपये/kWh मासिक GBI देगी। वहीं RWA के लिए 500 किलोवाट तक सोलर यूनिट पर 2 रुपये/kWh उपभोक्ताओं को प्रदान किया जाएगा। वहीं 200 मेगावाट की यूनिट के लिए उपभोक्ताओं को 1 रुपये/kWh की प्रारंभिक GBI दी देने व्यवस्था की गई है।

पूंजीगत सब्सिडी भी उपलब्ध
नई एनर्जी मसौदा के तहत रूफ टॉप सोलर (RTS) से उत्पादन पर कर और शुल्क नहीं लिया जाएगा। ये नियम दोनों पर लागू होगा चाहे वो निजी उपभोग के लिए हो या फिर ग्रिड को आपूर्ति के लिए। दिल्ली सरकार आवासीय उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी की स्कीम लेकर आई है। जिसके तहत प्रति उपभोक्ता 2,000 रुपये प्रति किलोवाट रुपये की दर से पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये होगी। इसे उपभोक्ताओं के बिजली के बिलों में एडजस्ट की जाएगी।

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