दिल्ली सरकार ने रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिकों की संख्या 15 लाख तक करने का रखा है लक्ष्य
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कल्याणकारी योजनाओं के तहत श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन की कम संख्या पर काफी समय पहले असंतोष जताते हुए अधिकारियों की फटकार लगाई थी। वहीं अब केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के निर्माण श्रमिकों के उत्थान के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाते हुए इस वर्ष रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिकों की संख्या 15 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, अभी तक पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की संख्या दिल्ली में 13 लाख है।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में दिल्ली शहर में रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिकों की संख्या को 15 लाख बढ़ाने का लक्ष्य रक्षा है। इसके साथ ही उन पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर आने पर 20 फीसदी की वृद्धि की जाएगी। इन मजदूरों के कल्याण पर खर्च की जाने वाली धनराशि 12.66 करोड़ रुपये से बढ़कर 246 करोड़ रुपये हो गया है।
सीएम ने पहले जताया था असंतोष
बता दें वर्ष 2023 की शुरूआत में केजरीवाल ने कल्याकारी योजनाओं में रजिस्टर्ड श्रमिकों की संख्या में कमी पर असंतोष जताया था उन्होंने कहा था कि श्रम विभाग सविभाग द्वारा श्रमिकों का सत्यापन करके इनकी संख्या में खासा इजाफा किया जा सकता है ताकि अपनी योजनाओं का लाभ सभी श्रमिकों तक पहुंचाया जा सके।
इनके कल्याण खर्च में करेगी वृद्धि
श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया पंजीकृत निर्माण मजूदरों की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ दिल्ली सरकार इस साल निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाकर 246 करोड़ रुपये करेगी, जो पिछले साल 12.66 करोड़ रुपये थी।
पंजीकृत निर्माण श्रमिकों ने 4,500 ने आवेदन किए थे
अधिकारी ने बताया 2022 में दिल्ली भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए पंजीकृत निर्माण श्रमिकों ने 4,500 ने आवेदन किए थे। उन्होंने बताया 2,000 से अधिक को 12.66 करोड़ रुपये के व्यय के साथ विभिन्न योजनाओं के लाभ के लिए प्रस्तावित किया गया था।
कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार कहां से लाती है धन
पिछले वित्तीय वर्ष के अंत तक बोर्ड के पास निर्माण उपकर के रूप में 4212.34 करोड़ रुपये इकट्ठा हुए थे। बता दें 10 लाख से अधिक लागत वाले निजी और आधिकारिक निर्माण प्रोजेक्ट पर एक प्रतिशत उपकर लगाया जाता है। इस उपकर के जरिए सरकार जो धन एकत्र करती है वो निर्माण श्रमिकों से संबंधी कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय करती है। इन कल्याणकारी योजनाओं के तहत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु के मामले में वित्तीय सहायता, मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था पेंशन, चिकित्सा देखभाल समेत अन्य में किया जाता है।












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