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Delhi EV Policy: अब मिनटों में बदल सकेंगे बैटरी! ई-चार्जिंग स्टेशनों की कमी होगी दूर,क्या है सरकार की पॉलिसी?

Delhi EV Policy Infrastructure 2026: दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ़्तार तो बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस कमी को दूर करने के लिए दिल्ली सरकार ने साल 2026 के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है।

सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या को 16,000 के पार ले जाना और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क को मजबूत करना है।

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Electric Vehicle Charging Points का संकट होगा खत्म?

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुचारू आवाजाही के लिए कुल 36,150 चार्जिंग प्वाइंट्स की आवश्यकता है। हालांकि, अभी केवल 8,849 प्वाइंट्स ही उपलब्ध हैं। यानी शहर में लगभग 27,000 से अधिक प्वाइंट्स की कमी है। इसी कमी को भरने के लिए सरकार ने इस साल के लिए 'त्रैमासिक लक्ष्य' (Quarterly Targets) निर्धारित किए हैं।

Delhi EV Policy 2026 का लक्ष्य

  • जनवरी - मार्च: 1,000 नए स्टेशन
  • अप्रैल - जून: 1,500 नए स्टेशन
  • जुलाई - सितंबर: 2,300 नए स्टेशन
  • अक्टूबर - दिसंबर: 2,200 नए स्टेशन
  • इस साल 7,000 नए चार्जिंग स्टेशन बनाने का लक्ष्य है, जिससे चार्जिंग प्वाइंट्स की संख्या में भारी इजाफा होगा।

Battery Swapping Stations Delhi रेंज की चिंता होगी खत्म

ई-रिक्शा और टू-व्हीलर मालिकों के लिए बैटरी स्वैपिंग एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। दिल्ली में 31 दिसंबर 2025 तक 893 स्वैपिंग स्टेशन थे, जबकि जरूरत 1,500 की है। सरकार की योजना दिसंबर 2026 तक इन स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 1,268 करने की है। इसके लिए पहली दो तिमाहियों में 25-25 स्टेशन और साल के अंत तक शेष लक्ष्य को पूरा किया जाएगा।

Pollution Control Delhi EV: कब आएगी 'ईवी नीति 2.0', प्रदुषण से मिलेगा निजात?

दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, बहुप्रतीक्षित दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 (Delhi EV Policy 2.0) को मार्च 2026 तक अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है। यह नई नीति केंद्र सरकार की PM ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना के साथ मिलकर काम करेगी। इसके तहत ग्राहकों को ईवी खरीदने पर नए प्रोत्साहन (Incentives) मिलेंगे, जिससे वाहनों की बिक्री और बढ़ेगी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष (2025) दिल्ली में 83,423 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ है, जो शहर में ईवी के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि चार्जिंग और स्वैपिंग स्टेशनों का जाल बिछने से लोग पेट्रोल-डीजल वाहनों को छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करेंगे, जिससे दिल्ली के प्रदूषण स्तर में गिरावट आएगी। इस साल के अंत तक दिल्ली में चार्जिंग स्टेशनों की कुल संख्या 16,000 से अधिक हो जाने का अनुमान है, जिससे ईवी मालिकों को चार्जिंग के लिए लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।

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