Delhi Exit Poll: BJP के लिए OBC फैक्टर बनी सत्ता की चाबी! वरना AAP से मिलती कड़ी टक्कर, पढ़ें समीकरण?

Delhi Chunav Exit Poll: दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका है। चुनाव आयोग के अनुसार, दिल्ली में 60.42% मतदान हुआ है। हालांकि, शनिवार 08 फरवरी को साफ हो जाएगा कि जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है। लेकिन, जो एग्जिट पोल सामने आने है उनके मुताबिक, 27 साल बाद बीजेपी की सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है।

एग्जिट पोल्स के अनुसार, इस बार ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वोटरों का रुझान बीजेपी की ओर बढ़ता दिख रहा है, जिससे पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में बढ़त मिल सकती है। यह वोट बैंक दिल्ली में अहम भूमिका निभाता है और इसके प्रभावी रुझान से बीजेपी को फायदा हो सकता है।

Delhi Exit Poll

एग्जिट पोल्स में ओबीसी वर्ग के साथ-साथ दिल्ली में ओवैसी की पार्टी 'एआईएमआईएम' (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन), बीएसपी (बहुजन समाज पार्टी) और कांग्रेस का भी अहम योगदान है। इन तीनों का इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक नया प्रभाव देखने को मिला है। इन तीनों दलों के संभावित वोटों का विभाजन बीजेपी के लिए सत्ता की चाबी बनता नजर आ रहा है।

ओबीसी फैक्टर और बीजेपी
दिल्ली में ओबीसी वोटर्स की संख्या लगभग 50 प्रतिशत है और इन वोटर्स का पिछले कुछ समय से बीजेपी की ओर रुझान दिखने को मिल रहा है। एग्जिट पोल्स के अनुसार, इस वर्ग के वोट से बीजेपी को काफी मजबूती मिल सकती है। ओबीसी वोटर्स में कई वर्ग और जातियों के लोग शामिल हैं, जिनकी पसंद और नापसंद चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है।

बीजेपी ने इस वर्ग को लुभाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे 'मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं' और ओबीसी के लिए आरक्षण की बढ़ी हुई सुविधाएं। इन योजनाओं से ओबीसी वर्ग का विश्वास बीजेपी के प्रति और भी मजबूत हुआ है।

ओवैसी, बीएसपी और कांग्रेस का असर
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने दिल्ली में कुछ क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत की है, खासकर उन इलाकों में जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। हालांकि, एग्जिट पोल्स से यह साफ हुआ है कि उनका वोट बैंक बीजेपी की बढ़त को पूरी तरह से प्रभावित नहीं कर पाया है, लेकिन पार्टी के उभरते प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वहीं, बीएसपी का भी अपना एक वोट बैंक है, जो खासकर दलित समुदाय के बीच प्रभावी है। बीएसपी ने अपने प्रचार के दौरान दिल्ली में पार्टी के कार्यों और 'बहनजी' मायावती की नेतृत्व को भुनाने की कोशिश की थी। हालांकि, एग्जिट पोल्स में बीएसपी के प्रभाव को काफी सीमित माना गया है।

कांग्रेस पार्टी की स्थिति इस बार पहले से कमजोर नजर आ रही है। पार्टी के नेता अपनी पुरानी छवि को सुधारने में जुटे हुए हैं, लेकिन एग्जिट पोल्स में कांग्रेस के लिए कोई बड़े सुधार का संकेत नहीं मिल रहा है। हालांकि, कांग्रेस के कुछ पारंपरिक वोटर्स अब भी पार्टी के साथ खड़े हैं।

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