Delhi Election 2025: दिल्ली की वो 10 सीट, जहां मुस्लिम वोटर तय करते हैं कौन जीतेगा चुनाव?
Delhi Election 2025: दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए पांच फरवरी को वोटिंग होनी है और रिजल्ट आठ फरवरी को आएंगे। दिल्ली में इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कांटे की टक्कर होगी। ऐसे में दिल्ली के मुस्लिम वोटर इस चुनाव में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।
दिल्ली के चुनावों में मुस्लिम वोटरों की हमेशा से एक अहम भूमिका रही है। मुस्लिम वोटर कई निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक साबित होते हैं। उनकी एकजुटता हमेशा से दिल्ली चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डालती है। दिल्ली में लगभग 21 लाख मुस्लिम वोटर हैं। दिल्ली में 10 से 12 मुस्लिम बहुल इलाके हैं। इन 10 से 12 सीटों पर मुस्लिम वोटर ही तय करते हैं कि चुनाव कौन जीत रहा है।

आमतौर पर मुस्लिम वोटर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य छोटे दलों को समर्थन देते रहे हैं। जबकि मुस्लिम मतदाता भाजपा के कोर वोटर नहीं समझे जाते हैं। जब से दिल्ली में भाजपा का चुनावी प्रदर्शन बढ़ा है, मुस्लिम समुदाय की वोटिंग पैटर्न में भी बदलाव देखा गया है।
दिल्ली की 6 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम समुदाय गेमचेंजर साबित होते हैं। सीलमपुर, मटिया महल , ओखला , मुस्तफाबाद , बल्लीमारान, बाबरपुर सीट है। 2020 के विधानसभा चुनावों में आप ने इन सभी छह सीटों पर जीत हासिल की थी। इन छह सीटों के अलावा भी दिल्ली में छह सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या अच्छी और वो चुनाव नजीतों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली की वो 10 से 12 सीटें कौन सी हैं? जहां मुस्लिम वोटर तय करते हैं हार-जीत?
- 1. सीलमपुर विधानसभा सीट: 50 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 2. मटिया महल विधानसभा सीट: 48 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 3. ओखला विधानसभा सीट: 43 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 4. बल्लीमारान विधानसभा सीट : 38 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 5. मुस्तफाबाद विधानसभा सीट: 40 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 6.बाबरपुर विधानसभा सीट: 35 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 7. सीमापुरी विधानसभा सीट: 25 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 8. गांधीनगर विधानसभा सीट: 22 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 9. चांदनी चौक विधानसभा सीट: 20 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 10. सदर बाजार विधानसभा सीट: 20 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 11. विकासपुरी विधानसभा सीट: 20 फीसदी मुस्लिम वोटर
- 12. कारावल नगर विधानसभा सीट: 20 फीसदी मुस्लिम वोटर
इन सीटों के अलावा बावना , जामिया नगर, शहदरा इन सीटों पर भी मुस्लिम समुदाय का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। दिल्ली चुनावों में आप, कांग्रेस और अन्य दल मुस्लिम वोटरों को आकर्षित करने के लिए विशेष रणनीतियां अपनाते हैं। AAP और कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्रों में मुस्लिम समुदाय के हितों का ध्यान रखने का वादा किया है।
आप ने अक्सर यह दावा किया है कि उसने मुस्लिम समुदाय की भलाई के लिए कई योजनाओं को लागू किया है। अब आने वाले चुनाव में देखना होगा कि दिल्ली के मुस्लिम वोटर आप या कांग्रेस किसका साथ देते हैं। इस बार दिल्ली में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भी चुनाव लड़ रही है। ऐसे में ये आप और कांग्रेस के वोट शेयर में सेंध लग सकती है।












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