Delhi Election 2025: दिल्‍ली में कांग्रेस तय करेगी AAP या BJP किसकी बनेगी सरकार? जानिए कैसे

Delhi Election 2025: दिल्‍ली विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को दिल्‍ली के वोटर्स वोट करेंगे। दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी लगातार तीसरी बार सत्‍ता में आने की कोशिश कर रही है। वहीं दिल्‍ली की सत्‍ता से वर्षों से दूर भाजपा इस चुनाव में बंपर जीत हासिल कर अपना 27 साल का वनवास खत्‍म करना चाहती है।

हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस भी पूरे दम-खम और कई फ्री योजनाओं को लेकर दिल्‍ली के चुनावी मैदान में उतरी है लेकिन इस बार के चुनाव में मुख्‍य तौर पर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच लड़ाई होती दिखाई पड़ रही है लेकिन वास्तविकता ये है कि इस चुनाव में कांग्रेस का चुनाव परिणाम ही तय करेगा कि दिल्‍ली में किस पार्टी की सरकार बनेगी!

Delhi Election 2025

बता दें जून 2024 में संपन्‍न हुए लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के अंतर्गत आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने सीटें शेयर कर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन छह महीने बाद हो रहे दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। जिसके कारण इस बार का चुनाव और भी दिलचस्‍प माना जा रहा है।

कांग्रेस के कारण दिल्‍ली में "आप" की बनी दो बार सरकार

गौरतलब है कि दिल्‍ली में हुए पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी की जो दिल्‍ली में जड़े मजबूत हुई हैं उसका सारा श्रेय कांग्रेस को जाता है। सीधे कहे तो दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी ने राष्‍ट्रीय पार्टी कांग्रेस की जगह ले ली है।

कांग्रेस तय करेगी दिल्‍ली में आप या भाजपा सरकार?

राजनीति के जानकारों का मनाना है कि दिल्‍ली चुनाव में अगर कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करती है तो ऐसी स्थिति में भाजपा को फायदा मिल सकता है। क्‍योंकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का वोट बैंक एक जैसा है।पिछले दो चुनावों की तुलना में अगर कांग्रेस कुछ सीटों पर उम्‍मीद से अधिक प्रदर्शन करती है तो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच वोट बैंक बंट जाएगा और जिसका फायदा भाजपा को सीधे मिल सकता है।

कांग्रेस का टारगेट क्‍या है?

जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस बार दिल्‍ली में 17 फीसदी वोट हासिल करना चाह रही है अगर 17 फीसदी वोट मिले तो कांग्रेस लगभग 7 सीटें जीत सकती है। दिल्‍ली की 20 सीटों पर कांग्रेस ने अपने मजबूत उम्‍मीदवार उतारे है, इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस को उम्‍मीद है कि मुस्लिम और दलित बहुल्‍य सीटों पर उसका प्रदर्शन बेहतर रहेगा।

दिल्‍ली में रहा है ये चुनावी पैटर्न

बता दें , दिल्‍ली में 1993 के बाद हुए विधानसभा चुनाव में एक बार को छोड़कर हर बार बहुमत की सरकार बनी है। वर्ष 1993 से ही ये पैटर्न रहा है कि दिल्‍ली में जिस भी पार्टी को 40 फीसदी से अधिक वोट मिलता है उसी की सरकार बनती है। केवल 2013 ऐसा था जब आप, कांग्रेस और भाजपा किसी भी पार्टी को 40 फीसदी वोट नहीं मिला था।

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