Delhi Divyang Yojana: दिल्ली हाट में दिव्यांगजनों को दुकानें देगी रेखा सरकार, कैसे करें अप्लाई, क्या हैं शर्ते
Delhi Divyang Yojana: दिल्ली में दिव्यांगजनों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता को लेकर रेखा सरकार ने एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है। राजधानी की पहचान बन चुके दिल्ली हाट में अब दिव्यांगजनों को भी दुकानें आवंटित की जाएंगी। यह योजना पिछले कई वर्षों से ठप पड़ी थी, जिसे अब दोबारा शुरू किया गया है। सरकार का मकसद साफ है-दिव्यांगजनों को सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि सम्मान के साथ कमाई का मौका देना।
दिल्ली हाट में दिव्यांगजनों को मिलेगा कारोबार का मंच
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम यानी डीटीटीडीसी ने आईएनए स्थित दिल्ली हाट में स्मृति चिन्ह की दुकान के लिए ई-निविदा जारी की है। यह निविदा खास तौर पर पात्र दिव्यांगजनों के लिए है। दिल्ली हाट जैसे प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थल पर दुकान मिलना किसी भी छोटे कारोबारी के लिए बड़ा अवसर माना जाता है। इससे न सिर्फ आमदनी बढ़ेगी, बल्कि उनके काम को पहचान भी मिलेगी।

एक साल का आवंटन, आगे बढ़ने का भी मौका
दुकान का आवंटन शुरू में एक वर्ष के लिए किया जाएगा। डीटीटीडीसी के विवेक से इसे अगले एक साल के लिए बढ़ाया भी जा सकता है, हालांकि इसके लिए मासिक उप-लाइसेंस शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। निविदा दस्तावेज के मुताबिक, इस दुकान का अनुमानित अनुबंध मूल्य 30.71 लाख रुपये रखा गया है। वहीं, आरक्षित मासिक लाइसेंस शुल्क 2.55 लाख रुपये तय किया गया है। यह व्यवस्था सरकार की गंभीरता को दिखाती है कि योजना सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे।
कौन कर सकता है आवेदन, जानिए पात्रता की शर्तें
निविदा के तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही उसके पास सरकार द्वारा जारी कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता का वैध प्रमाणपत्र होना जरूरी है। एक अहम शर्त यह भी रखी गई है कि आवेदक या उसके परिवार का कोई सदस्य दिल्ली सरकार की दिव्यांगजन योजनाओं के तहत पहले से किसी दुकान, कियोस्क, स्टॉल या पीसीओ बूथ का मालिक या संचालक नहीं होना चाहिए।
परिवार की मदद से दुकान चलाने की छूट
सरकार ने यह भी समझा है कि हर दिव्यांग व्यक्ति के लिए अकेले दुकान चलाना संभव नहीं होता। इसी वजह से निविदा में साफ कहा गया है कि बौद्धिक दिव्यांगता, तंत्रिका संबंधी विकार या बहु-दिव्यांगता वाले व्यक्ति परिवार के किसी सदस्य की सहायता से दुकान चला सकते हैं। अगर दिव्यांगता की प्रकृति ऐसी है कि व्यक्ति खुद स्टॉल नहीं संभाल सकता, तो सक्षम अधिकारी की अनुमति से कोई अधिकृत प्रतिनिधि उसकी ओर से दुकान का प्रबंधन कर सकेगा।
समावेशी सोच की मिसाल बनी योजना
यह पहल सिर्फ एक दुकान के आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना प्राथमिकता है। दिल्ली हाट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर मौका देकर सरकार यह संदेश दे रही है कि दिव्यांगजन भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें सही अवसर दिया जाए। यह योजना आने वाले समय में कई परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।












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