Delhi Cold Wave: दिल्ली में कितना गिरेगा पारा तो जम जाएगा पानी? इंसानी शरीर भी देने लगेगा जवाब
Delhi Cold Wave Alert: राजधानी दिल्ली में पारा लगातार गिर रहा है। शीतलहर के बीच न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में चर्चा गर्म है कि क्या दिल्ली में भी पहाड़ों की तरह पानी जमने की नौबत आ सकती है?
अमूमन हम जानते हैं कि पानी का फ्रीजिंग पॉइंट (Freezing Point) जीरो डिग्री सेल्सियस होता है, लेकिन दिल्ली जैसे मैदानी इलाकों में पानी के जमने का विज्ञान थोड़ा अलग और चौंकाने वाला है।

Delhi में जीरे डिग्री सेल्सियस पर भी नहीं जमेगा पानी?
साइंस के नजरिए से देखें तो शुद्ध पानी (Pure Water) जीरे डिग्री सेल्सियस पर जमना शुरू हो जाता है, लेकिन दिल्ली की हवा और आपके नलों में आने वाला पानी 'शुद्ध' नहीं होता। इसमें कई तरह के मिनरल्स, लवण (Salts) और अशुद्धियां घुली होती हैं।
Delhi में कितना है फ्रीजिंग पॉइंट?
ये अशुद्धियां पानी के फ्रीजिंग पॉइंट को थोड़ा और नीचे धकेल देती हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में 'फ्रीजिंग पॉइंट डिप्रेशन' कहते हैं। यानी दिल्ली के नलों का पानी जमने के लिए तापमान को शून्य से भी थोड़ा नीचे (जैसे -1 डिग्री सेल्सियस या -2 डिग्री सेल्सियस) जाना पड़ सकता है।
खुले मैदान और कार की छतों पर क्यों जमती है बर्फ?
भले ही थर्मामीटर में तापमान 3 या 4 डिग्री दिख रहा हो, लेकिन आपने देखा होगा कि सुबह-सुबह कारों के शीशों या घास पर बर्फ की सफेद परत (Frost) जम जाती है। इसके पीछे 'रेडिएशन कूलिंग' (Radiation Cooling) का सिद्धांत काम करता है। रात के समय ज़मीन और वस्तुएं अपनी गर्मी बहुत तेज़ी से अंतरिक्ष की ओर छोड़ती हैं।
कई बार सतह का तापमान हवा के आधिकारिक तापमान से 4-5 डिग्री कम हो जाता है। यही वजह है कि जब हवा का तापमान 4 डिग्री होता है, तब ज़मीन पर रखी किसी चीज़ का तापमान जीरो डिग्री तक पहुंच जाता है और ओस की बूंदें जमने लगती हैं।
पाइपों में पानी जमना दिल्ली में मुमकिन है?
दिल्ली में फिलहाल पाइपों के अंदर पानी जमने की संभावना न के बराबर है। इसके दो मुख्य कारण हैं:
- 1. ग्राउंड इंसुलेशन: दिल्ली में अधिकांश पानी की पाइपलाइनें जमीन के अंदर हैं, जहां तापमान सतह की तुलना में अधिक स्थिर और गर्म रहता है।
- 2. तापमान का टिकाऊपन: पानी को पूरी तरह जमने के लिए तापमान का लगातार कई घंटों तक या उससे नीचे रहना जरूरी है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान अक्सर सुबह के कुछ ही घंटों के लिए गिरता है, जो पानी को ठोस बर्फ बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
पहाड़ों और दिल्ली की ठंड में बड़ा अंतर
पहाड़ों पर हवा का दबाव (Atmospheric Pressure) कम होता है और वातावरण में नमी का स्तर भी अलग होता है। दिल्ली में प्रदूषण के कण और 'अर्बन हीट आइलैंड' इफेक्ट (शहरी गर्मी) तापमान को अचानक जीरो से नीचे जाने से रोकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, भले ही दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ ठंड पड़ रही हो, लेकिन जब तक पारा शून्य से नीचे नहीं गिरता और वह स्थिति लंबे समय तक नहीं बनी रहती, तब तक फ्रीजिंग पॉइंट का असली 'असर' नलों में दिखाई देना मुश्किल है।
Delhi Cold Wave Alert: दिल्ली में सबसे ठंडी सुबह
राजधानी दिल्ली में गुरुवार की सुबह इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलते न्यूनतम तापमान लुढ़क कर 5.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। बुधवार के मुकाबले तापमान में आई इस बड़ी गिरावट और घने कोहरे के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा।
विजिबिलिटी कम होने और हाड़ कंपा देने वाली ठंड को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए दिल्ली के सभी स्कूलों को 15 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है। मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि अधिकतम तापमान 15 से 17 डिग्री के बीच रहेगा, जिससे दिन में भी ठिठुरन से राहत मिलने के आसार कम हैं।












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