‘हमने 2010 में ही कर दिया था फैसला', दिल्ली CM रेखा गुप्ता का बड़ा खुलासा, बॉडी डोनेशन को बताया सबसे बड़ा दान

Delhi CM Rekha Gupta Donate Body: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने को एक ऐसा खुलासा किया जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक भी किया और प्रेरित भी। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनके पति ने साल 2010 में ही अपने शरीर दान करने के लिए रजिस्ट्रेशन करा दिया था। यह बात उन्होंने 'वर्दान' फिल्म फेस्टिवल के मंच से कही, जहां अंगदान और देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया जा रहा था।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ शब्दों में कहा कि अंगदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी को नया जीवन देने का सबसे बड़ा उपहार है। उनका कहना था कि समाज में इस विषय पर खुलकर बातचीत होनी चाहिए ताकि लोग बिना डर और भ्रम के आगे आ सकें।

My husband and I registered in 2010 to donate our bodies Delhi CM Rekha Gupta

दिल्ली में बना मजबूत सिस्टम, 800 से ज्यादा लोग जुड़े

रेखा गुप्ता ने बताया कि पहले दिल्ली में अंगदान को लेकर कोई व्यवस्थित और आधिकारिक तंत्र नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य स्तर पर 'स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन' यानी SOTTO की स्थापना की गई। यह प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए है जो अंगदान का संकल्प लेना चाहते हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि सितंबर से अब तक 838 लोग इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करा चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी जागरूकता की जरूरत बहुत ज्यादा है और इस दिशा में समाज को आगे आना होगा।

राष्ट्रीय स्तर पर National Organ and Tissue Transplant Organisation यानी NOTTO इस काम को समन्वित कर रहा है, जो अंगदान की प्रक्रिया को सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

कला और सिनेमा से समाज को संदेश

यह फिल्म फेस्टिवल 'दधीचि देह दान समिति' की ओर से आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से अपील की कि वे खुद जागरूक बनें और समाज में भी इस विषय पर सकारात्मक सोच फैलाएं।

उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें समाज में प्रगतिशील विचारों को मजबूत करती हैं और सेवा भावना को बढ़ावा देती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंगदान को जन आंदोलन बनाने की अपील का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश के लिए मार्गदर्शक संदेश है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

रेखा गुप्ता के मुताबिक कला और फिल्मों के जरिए अगर यह संदेश आम लोगों तक पहुंचे तो अंगदान सचमुच एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है। उनके निजी संकल्प ने इस संदेश को और ज्यादा विश्वसनीय और प्रभावी बना दिया है।

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