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Delhi Chunav 2025: दिल्ली में जाट आरक्षण का सच? 5 प्वाइंट में पढ़िए इसके पीछे की राजनीति की पूरी पड़ताल

Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार जाट आरक्षण के मुद्दे को भी गरमाए जाने की कोशिश हो रही है। इसकी शुरुआत आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर की है। उनकी पार्टी ने इसे चुनावी हथियार बनाने की पूरी तैयारी कर रखी है। लेकिन, बीजेपी भी अपने बहुत बड़े वोट बैंक में सेंध लगने देने के लिए हरगिज तैयार नहीं है।

दिल्ली में जाट आरक्षण के मुद्दे पर सत्ताधारी आप और प्रमुख विपक्षी बीजेपी के नेताओं में जमकर मौखिक घमासान मचा हुआ है। केजरीवाल ने दिल्ली के जाटों को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल करने की मांग शुरू कर दी है, तो बीजेपी का आरोप है कि 10 साल तक उन्होंने इस समाज को नजरअंदाज किया और अब चुनाव में हार के डर से उन्हें भड़काने की कोशिशें शुरू कर रहे हैं।

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Delhi Chunav 2025: केजरीवाल ने जाट आरक्षण मुद्दे को चुनावों से पहले उठाया है

इस मुद्दे पर सोमवार को दिल्ली के जाट समाज के कुछ नेताओं ने केजरीवाल के आवास पर उनसे मुलाकात भी की। बाद में एक प्रेस कांफ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि इस संबंध में पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने के लिए दर्जनों जाट नेता उनका आभार जताने आए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2015 में पीएम मोदी ने दिल्ली के जाटों को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल करने का भरोसा भी दिया था।

Delhi Chunav 2025: बीजेपी AAP और केजरीवाल की मंशा को लेकर क्या कह रही है?

केजरीवाल के दावों पर बीजेपी भी उतनी ही जोरदार तरीके से पलटवार कर रही है। पश्चिमी दिल्ली की सांसद और बीजेपी की जाट नेता कमलजीत सहरावत ने आरोप लगाया है कि 'अपने डूबते सियासी जहाज को बचाने के लिए बेचैन अरविंद केजरीवाल दिल्ली के जाट समुदाय को आरक्षण के नाम पर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं..हालांकि, वे सफल नहीं होंगे।'

उन्होंने कहा कि दिल्ली का जाट समुदाय केजरीवाल से जानना चाहता है कि अपने 10 साल के कार्यकाल में जाट आरक्षण का प्रस्ताव विधानसभा में क्यों नहीं पेश किया।

भाजपा का दावा है कि केजरीवाल हार को सामने देखकर यह सब कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि आप से बीजेपी में शामिल हुए प्रमुख जाट नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत ने जाटों से जुड़े कई मुद्दे केजरीवाल के सामने रखने की कोशिश भी की थी, लेकिन वे उसे नजरअंदाज करते रहे।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली के जाटों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

2014 की बात है। आम चुनाव होने वाले थे। इससे ठीक पहले कांग्रेस की अगुवाई वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने जाटों को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल कर लिया था। लेकिन, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया और पूछा कि सरकार ने इस समुदाय को कोटा देने के खिलाफ दी गई इसपर बने पैनल की सिफारिशों को नजरअंदाज क्यों किया?

Delhi Chunav 2025: दिल्ली में कितना बड़ा है जाट वोट बैंक?

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर लगभग 7,00,000 जाट वोटर हैं। दिल्ली के पिछले तीन लोकसभा चुनावों के नतीजों से लगता है कि जाटों ने यहां भाजपा का जमकर समर्थन किया है। लेकिन, विधानसभा चुनावों में सीटों और प्रत्याशियों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों के हिसाब से इनके काफी वोट आम आदमी पार्टी के खाते में जाने के भी संकेत मिलते हैं।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली की किन सीटों पर जाट वोटरों का है दबदबा?

दिल्ली में नरेला,रिठाला, बवाना, मुंडका,नजफगढ़,द्वारका,पालम, मटियाला,नांगलोई जाट,विकासपुरी, मेहरौली और बिजवासन जैसी सीटों पर जाटों का वोट चुनाव के नतीजे तय करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होते रहे हैं।

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