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Delhi Chunav 2025: दिल्ली चुनाव में AAP को हार का डर क्यों लग रहा है? 5 प्वाइंट में पढ़िए

Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) लगातार चौथी बार सरकार बनाने के दावे तो कर रही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उसने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे लगता है कि पार्टी को कहीं न कहीं अपना जनाधार खिसकने का डर सता रहा है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की यह लगातार तीसरी सरकार है, जिसमें अंतिम दोनों कार्यकाल उसने अपने दम पर पूरा किया है। लेकिन, पार्टी ने अबतक जिन मुद्दों की कभी सुध नहीं ली, चुनाव की आहट के साथ ही उसको लेकर ताबड़तोड़ घोषणाओं की बौछार कर दी है।

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Delhi Chunav 2025: दिल्ली के जाटों को केंद्र की OBC लिस्ट में शामिल करने की मांग

गुरुवार (9 दिसंबर,2025) को आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्थान के जाट तो दिल्ली में केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल होने का फायदा उठा लेते हैं, लेकिन दिल्ली के जाटों को यह लाभ नहीं मिल पाता।

नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल को चुनौती दे रहे बीजेपी उम्मीदवार और पार्टी के पूर्व सांसद परवेश साहिब वर्मा ने चुनाव से ठीक पहले उनकी इस मांग पर सवाल उठाया है। परवेश वर्मा खुद ही जाट नेता हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि 'केजरीवाल ने 10-11 साल में इनके लिए काम नहीं किया और चुनाव से 25 दिन पहले उन्हें जाट याद आ गए।'

उन्होंने उनसे पूछा है कि ऐसा है तो 10 साल में विधानसभा से प्रस्ताव पास करके केंद्र को क्यों नहीं भेजा? आम आदमी पार्टी ने एक भी जाट को राज्यसभा क्यों नहीं भेजा?'

नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल को इस बार खुद बड़े जाट नेता से मुकाबला करना पड़ रहा है। दिल्ली में इनकी आबादी करीब 10% है। दिल्ली की महरौली, मुंडका,रिठाला, नांगलोई, मटियाला, बिजवासन,नजफगढ़, द्वारका, पालम, और विकासपुरी जैसी सीटों पर इनका दबदबा है।

Delhi Chunav 2025: मुस्लिम इमामों और मौलानाओं की जगह सनातन धर्म और संतों की ओर देखना शुरू किया

दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी के बदले रुख का एक और संकेत अचानक सनातन धर्म के हिमायती बनने से लग रहा है। पहले केजरीवाल ने पुजारियों और ग्रंथियों को 18,000 रुपए महीने मानदेय देने का वादा किया।

फिर अचानक सनातन सेवा समिति के नाम पर संतों का महिमा मंडन करना शुरू कर दिया। बीजेपी के मंदिर प्रकोष्ठ से आने वाले संतों और पुजारियों के लिए भव्य आयोजन करवाया।

दूसरी तरफ दिल्ली सरकार जो आप के कार्यकाल में इमामों को हर महीने 18,000 रुपए देती थी, उनका वेतन 17 महीने से रोक दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाल ही में केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन भी किया था।

Delhi Chunav 2025: इंडिया ब्लॉक से लगानी पड़ी समर्थन की गुहार

दिल्ली चुनाव को लेकर कांग्रेस शुरू में बहुत सक्रिय दिख रही थी। इसी दौरान उसकी ओर से आप पर हमले बढ़ने के बाद पार्टी के नेताओं ने इंडिया ब्लॉक से शिकायत करने की बात कही।

बाद में दिखने लगा कि इंडिया ब्लॉक की तमाम पार्टियां मसलन- सपा,टीएमसी, शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी और यहां तक की कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डीएमके भी केजरीवाल की पार्टी के समर्थन में आ गई।

ऐसे में साफ लग रहा है कि भले ही आप ने इस चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया हो, लेकिन तगड़ी लड़ाई देखकर उसे इंडिया ब्लॉक के दलों से अपने लिए समर्थन जुटाने की नौबत आ पड़ी है।

Delhi Chunav 2025: भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी की इस बार की सबसे बड़ी मुश्किल उसके नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में सीएम रहते हुए तिहाड़ में रहकर अभी बेल पर बाहर निकले हुए हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ भी यही हुआ और सांसद संजय सिंह भी अदालत से जमानत लेकर राजनीति कर रहे हैं। केजरीवाल को तो सशर्त जमानत मिली हुई है, जिसकी वजह से उन्हें बाहर आकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ा है।

केजरीवाल के पहले वाले सरकारी आवास की साज-सज्जा पर सीएजी की रिपोर्ट से मालूम पड़ता है कि उसमें जनता के पैसे पानी की तरह बहाए गए। विपक्षी बीजेपी ने इसे 'शीशमहल' बताकर आम आदमी पार्टी और उसके नेता केजरीवाल के खिलाफ अभियान चला रखा है। कहीं न कहीं इन आरोपों की वजह से आम आदमी पार्टी जरूर दबाव में हो सकती है।

Delhi Chunav 2025: एंटी-इंकंबेंसी से बचाव के लिए मौजूदा विधायकों पर गिराई गाज

2020 में आम आदमी पार्टी के दिल्ली के 70 में से 67 विधायक जीते थे। उनमें से कुछ पहले ही पार्टी छोड़ चुके थे। इस बार पार्टी ने 70 सीटों पर जो उम्मीदवार उतारे हैं, उनमें लगभग 20 सीटों पर मौजूदा विधायकों का पत्ता काट दिया है, जिनमें से कई बगावत का संकेत दे रहे हैं। करीब 10 विधायकों की लिस्ट भी वनइंडिया को हाथ लगी है, जिन्होंने बीजपी में शामिल होने का इशारा किया है।

विधायकों का टिकट काटने के पीछे बड़ी वजह पार्टी और विधानसभा क्षेत्रों में उसके खिलाफ पिछले 10-11 वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी है। राजधानी के कई इलाकों में खराब सड़कें,पेयजल की दिक्कत, जल भराव की समस्या, जानलेवा प्रदूषण, गंदगी, जहरीला हो चुका यमुना का पानी और कूड़े के पहाड़ ने पार्टी को काफी दबाव में ला रखा है।

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