Delhi के स्कूलों में कौन फैला रहा खौफ? कब-कब मिली धमकी, क्या निकला नतीजा! डर के साए में स्टूडेंट्स-पेरेंट्स
Delhi School Bomb Threat: दिल्ली में बीते तीन दिनों से स्कूलों और कॉलेजों को ईमेल के जरिए बम धमकी मिल रही है। सोमवार से बुधवार (14 से 16 जुलाई 2025) के बीच अब तक 10 स्कूल और एक कॉलेज इस तरह के मेल का शिकार बन चुके हैं।
अच्छी बात यह रही कि किसी भी स्थान पर अब तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन इसने पेरेंट्स और स्टूडेंट्स में जबरदस्त डर पैदा कर दिया है।

कब-कब धमकी मिली?
7 फरवरी, 2025 को किन स्कूलों में मिली बम की धमकी
- नई दिल्ली के अहलकॉन इंटरनेशनल स्कूल को बम की धमकी मिली
सोमवार (14 जुलाई) को किन-किन स्कूलों में मिली धमकी
- नेवी स्कूल, चाणक्यपुरी
- सीआरपीएफ स्कूल, द्वारका
- एक अन्य स्कूल, रोहिणी
मंगलवार (15 जुलाई) को किन-किन स्कूल-कॉलेज को मिली धमकी
- सेंट थॉमस स्कूल, द्वारका
- सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी
बुधवार (16 जुलाई) को किन-किन स्कूल-कॉलेज को मिली धमकी
कॉलेज: सेंट स्टीफन कॉलेज को सुबह 7:15 बजे मेल मिला, जिसमें कहा गया कि कॉलेज की लाइब्रेरी और परिसर में 4 IED और 2 RDX लगाए गए हैं जो दोपहर 2 बजे फटेंगे।
स्कूल:
- सेंट थॉमस स्कूल (Dwarka)
- वसंत वैली स्कूल (Vasant Kunj)
- मदर्स इंटरनेशनल स्कूल (Hauz Khas)
- रिचमंड ग्लोबल स्कूल (Paschim Vihar)
- सरदार पटेल विद्यालय (Lodi Estate)
क्या मिला जांच में?
सभी मेल मिलते ही दिल्ली पुलिस, क्राइम एंड क्रिमिनल साइकोलॉजी सेक्शन (CCPS), बम डिस्पोजल टीम (BDT) और डॉग स्क्वॉड की टीमें तुरंत एक्शन में आईं। अब तक किसी भी स्कूल या कॉलेज में कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।
किसने और कैसे भेजी बंम की धमकी?
- धमकी ईमेल के जरिए भेजी गई है।
- शुरुआती जांच के मुताबिक, ईमेल में फर्जी नाम और मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया है, ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो।
पुलिस की साइबर सेल मेल के IP एड्रेस और सर्वर लोकेशन को ट्रैक कर रही है, लेकिन अब तक किसी व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह मेल VPN और डार्क वेब टूल्स की मदद से भेजा गया हो सकता है- जिससे भेजने वाले तक सीधे पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कोई संगठन या ग्रुप अब तक सामने नहीं आया है जिसने इस धमकी की जिम्मेदारी ली हो।
क्या किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी तो नहीं?
दिल्ली पुलिस इसे साइबर-जोक, मानसिक आतंक या साजिश मानकर जांच कर रही है। कुछ अफसर मानते हैं कि ये मेल्स केवल अफरातफरी फैलाने के लिए हैं, लेकिन अगर लगातार ऐसा पैटर्न चलता रहा, तो साइबर टेररिज्म की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब आगे क्या?
पुलिस ने सभी स्कूलों को सावधानी बरतने और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से जांच को तेज किया जा रहा है। अगले कुछ दिन बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।












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