Delhi AQI: GRAP-3 के बीच SC का राहत पैकेज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बेरोजगार मजदूरों को तुरंत दें भत्ता

Delhi AQI: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 19 नवंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में GRAP-3 लागू होने के बाद जिन निर्माण श्रमिकों का काम बंद हो गया है, उन्हें जीविका भत्ता (Subsistence Allowance) दिया जाए। इस आदेश के बाद लाखों श्रमिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

बचता दें कि, दिल्ली-NCR कई दिनों से जहरीली हवा में घिरा हुआ है, जहां AQI लगातार 'Very Poor' से 'Severe' श्रेणी में बना हुआ है।

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इसी गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जनता के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका-तीनों को सीधे प्रभावित कर रहा है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारों को तुरंत, ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे, क्योंकि हर दिन की देरी लोगों को और गंभीर जोखिम में डाल रही है।

GRAP-3 के कारण मजदूर हुए बेरोजगार

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्तर तक पहुंचने के बाद GRAP-3 लागू किया गया था, जिसके तहत सभी गैर-जरूरी निर्माण कार्यों पर रोक है। इस रोक के कारण बड़ी संख्या में निर्माण श्रमिकों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कहा कि "इन मजदूरों की आजीविका बाधित हुई है, इसलिए राज्यों को तुरंत आर्थिक सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए।"

CJI बी.आर. गवई की बेंच ने दिए निर्देश

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की सरकारें निर्माण मजदूरों को तुरंत भत्ता जारी करें और इसके वितरण में किसी तरह की देरी न हो। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सहायता राशि केवल असली लाभार्थियों तक ही पहुंचे। बेंच ने चिंता जताई कि लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता मजदूरों पर दोहरा असर डाल रही है-एक तरफ उनकी सेहत पर खतरा, दूसरी ओर रोज़गार छिनने की स्थिति।

इसके साथ ही अदालत ने राज्यों को वायु प्रदूषण रोकने के लिए और अधिक कठोर तथा प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकथाम उपायों की नियमित समीक्षा हो, सड़क धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों के धुएं पर तुरंत नियंत्रण किया जाए और पराली जलाने की घटनाओं पर सख्त निगरानी रखी जाए। बेंच ने जोर देकर कहा कि हवा की गुणवत्ता में सुधार तभी संभव है जब सभी राज्य मिलकर GRAP के नियमों का ईमानदारी से पालन करें।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और स्पष्ट निर्देशों के बाद उम्मीद है कि प्रभावित निर्माण मजदूरों को जल्द ही भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही चारों राज्यों-दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान-में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकारी कार्रवाई की रफ्तार भी तेज होगी।

GRAP-3 के लागू होने से ठप पड़े निर्माण कार्यों और उससे प्रभावित क्षेत्र की निगरानी तथा राहत उपायों पर भी अब अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है। कुल मिलाकर, अदालत का यह फैसला एक ओर जहां निर्माण श्रमिकों के लिए आर्थिक राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण नियंत्रण की सरकारी कोशिशों को भी नई गति देगा।

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