दिल्ली दंगे: अदालत ने हत्या को बताया सोची समझी साजिश, कहा- गवाह ने नाले के पीछे छुपकर देखी पूरी घटना
दिल्ली की एक अदालत ने पिछले साल पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों के दौरान मारे गए व्यक्ति की कथित हत्या को सोची समझी साजिश बताते हुए हत्या के चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश के आरोप तय किये हैं।
नई दिल्ली, 12 नवंबर। दिल्ली की एक अदालत ने पिछले साल पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों के दौरान मारे गए व्यक्ति की कथित हत्या को सोची समझी साजिश बताते हुए हत्या के चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश के आरोप तय किये हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में एक मुख्य गवाह ने छुपकर इस पूरी घटना को देखा। आरोपियों में अनवर हुसैन, कासिम, शाहरुख और खालिद अंसारी शामिल हैं जिन पर 25 फरवरी, 2020 को आंबेडकर कॉलेज के पास दीपक नाम के एक व्यक्ति की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई कर हत्या करने का आरोप है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार खून बहने से उसकी मौत हुई थी।

न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि गैरकानूनी तरीके से जमा होने से पीड़ित पर सुनियोजित हमले की साजिश भी व्यापक रूप से प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि लामबंदी और इरादे के तरीके से जैसा कि उनके आचरण से लगता है, उक्त गैरकानूनी जमावड़ा दंगों और दीपक की हत्या जैसे अन्य अपराधों को अंजाम देने के उद्देश्य से किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले के सहसे महत्वपूर्ण गवाह सुनील कुमार थे, जिन्होंने इस पूरी घटना के बारे में बताया कि कैसे दीपक को आरोपी व्यक्तियों समेत हथियारबंद मुसलमानों की भीड़ द्वारा मार दिया गया था। अदालत के आदेश के अनुसार, सुनील ने कहा था, 25 फरवरी को, कर्दमपुरी पुलिया से गैरकानूनी रूप से मुसलमानों की एक भीड़ आ रही थी और अल्लाह हो अकबर का नारा लगाते हुए पुलिया गोकुलपुर को पार करने की कोशिश कर रही थी। उस हथियारबंद गैरकानूनी भीड़ ने दीपक को पकड़ लिया जिसे बेरहमी से पीटा गया था। सुनीन ने बताया कि वह नाले के पीछे एक दीवार की आड़ में छिप गए थे, जहां से उन्होंने इस पूरी घटना को देखा।
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अदालत ने कहा कि इस प्रकार अभियोजन पक्ष न्यायालय को संतुष्ट करने में सक्षम रहा कि एक गैरकानूनी भीड़ ने दंगे किए और घातक हथियार से दीपक को मारा जिससे उसकी मौत हो गई। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस), 302 (हत्या), धारा 149 (गैरकानूनी सभा), और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत चारों दोषियों पर आरोप तय किए। बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तरपूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थकों और इसका विरोध करने वालों के बीत बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 लोग घायल हो गए थे।












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