Air India Crash: Air India kanishk क्रैश में था खालिस्तानियों का हाथ, कनाडा कबूली सच्चाई, क्या है पूरा मामला?

Canada on Kanishka Crash: भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कई दशकों से खालिस्तानी चरमपंथ एक बड़ा विवाद रहा है। अब इस मुद्दे पर एक ऐतिहासिक और बेहद अहम बदलाव देखने को मिला है। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि साल 1985 में एयर इंडिया के 'कनिष्क' विमान में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी आतंकवादी ही जिम्मेदार थे।

इस आधिकारिक स्वीकार्यता को भारत की बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत माना जा रहा है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां कई सालों से कनाडा सरकार को चेतावनी देती रही थीं कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए हो रहा है। हालांकि, अब तक कनाडा इस सच्चाई को खुलकर स्वीकार करने से बचता रहा था।

Canada on Kanishka Crash

23 जून 1985 का वह दर्दनाक दिन

एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला दुनिया के सबसे भयानक विमानन आतंकवादी हमलों में से एक माना जाता है। 23 जून 1985 को टोरंटो से उड़ान भरने वाला यह विमान लंदन के रास्ते भारत आ रहा था। लेकिन आयरलैंड के तट के पास उड़ान के दौरान विमान में जोरदार धमाका हुआ और वह समुद्र में गिर गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई। यह घटना आज भी वैश्विक विमानन इतिहास के सबसे दर्दनाक आतंकी हमलों में गिनी जाती है।

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CSIS ने पहली बार सार्वजनिक रूप से क्या कहा?

इस भयावह हादसे की 41वीं बरसी पर कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी अपने आधिकारिक बयान में साफ लिखा कि 23 जून 1985 को कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा विमान में रखा गया बम ही इस त्रासदी की वजह बना, जिसमें विमान में सवार सभी यात्रियों की जान चली गई। एजेंसी ने यह भी माना कि यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला था। CSIS ने कहा कि इस घटना ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सोच को हमेशा के लिए बदल दिया। उस समय यह एजेंसी सिर्फ एक साल पुरानी थी और कनिष्क हादसे ने इसके आगे के विकास और कामकाज की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि

इस मौके पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी एयर इंडिया फ्लाइट 182 हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देशवासियों से हिंसक चरमपंथ के खिलाफ एकजुट रहने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एयर इंडिया फ्लाइट 182 की त्रासदी हमें हमेशा सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा एजेंसियों को और मजबूत बनाने की सीख देती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

भारत के पुराने आरोपों को मिली बड़ी ताकत

कनाडा का यह नया रुख भारत की उस बात को मजबूत करता है जिसे नई दिल्ली कई सालों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाती रही है। भारत लगातार कहता रहा है कि कनाडा ने राजनीतिक कारणों से ऐसे चरमपंथी तत्वों को पनाह दी, जो वहां बैठकर भारत की सुरक्षा, एकता और अखंडता के खिलाफ गतिविधियां चलाते रहे। अब जब कनाडा की अपनी खुफिया एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से खालिस्तानी आतंकवादियों की भूमिका स्वीकार कर ली है, तो भारत के लंबे समय से उठाए जा रहे दावों को भी नई मजबूती मिली है।

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329 लोगों की ने गवाई थी जान

इस आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 329 लोगों में से 268 कनाडाई नागरिक थे, जो भारतीय मूल के थे। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि विमान में सवार लोगों में लगभग एक-तिहाई छोटे बच्चे थे। स्कूलों की छुट्टियां होने के कारण वे अपने परिवारों के साथ भारत घूमने आ रहे थे। जांच में सामने आया कि आतंकियों ने एक अनक्लेम्ड बैग में बम छिपाकर उसे विमान तक पहुंचाया था, जिसके बाद उड़ान के दौरान धमाका हुआ।

जांच में सामने आई कनाडा की बड़ी लापरवाही

इस मामले की जांच के दौरान कनाडा की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भारी आलोचना झेलनी पड़ी। बाद में हुई न्यायिक जांचों में सामने आया कि कनाडाई पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच सही तालमेल नहीं था। इसी वजह से इतनी बड़ी साजिश का समय रहते पता नहीं चल सका और सैकड़ों लोगों की जान चली गई। इस मामले को कनाडा की सबसे बड़ी सुरक्षा विफलताओं में भी गिना जाता है।

2025 की रिपोर्ट से ही मिलने लगे थे बदलाव के संकेत

मार्च 2025 में जारी अपनी सार्वजनिक रिपोर्ट में भी CSIS ने पहली बार कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी संगठनों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया था। अब एयर इंडिया कनिष्क ब्लास्ट को लेकर आया कनाडा का ये नया बयान दिखाता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर कनाडा की सोच और नीतियों में बड़ा बदलाव आ रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कनाडा आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ इसी तरह सख्त रुख अपनाता है, तो भारत के साथ उसके आर्थिक, व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को भी नई दिशा मिल सकती है।

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