Delhi Ordinance विवाद: कांग्रेस की नसीहत, केजरीवाल शीला दीक्षित से सीखें, BJP बोली- मकसद करप्शन की जांच
Delhi Ordinance सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 8 दिनों बाद आया। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने अध्यादेश को असंवैधानिक करार दिया। कांग्रेस भी भाजपा पर हमलावर है।

Delhi Ordinance पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन ने सीएम केजरीवाल से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की यात्रा से "सबक लेने" की नसीहत दी। इसी बीच केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने अध्यादेश पर विवाद को गैर जरूरी करार दिया।
उन्होंने कहा, AAP की सरकार में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए अध्यादेश लाया गया है। लेखी ने कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल का नाम लिए बिना कहा कि जो भी पार्टी या नेता अध्यादेश विवाद में AAP के समर्थन में आएंगे वे भी भ्रष्ट कहलाएंगे।
दरअसल, दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने दिवंगत शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री के कार्यकाल को याद किया। रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सलाह दी। माकन ने केजरीवाल से दिल्ली की बेहतरी के लिए दिवंगत कांग्रेस नेता की यात्रा पर ध्यान देने को कहा।
बता दें कि दिल्ली में सरकारी सेवकों की सर्विस पर नियंत्रण के संबंध में केंद्र ने अध्यादेश पर विवाद हो रहा है। समिति के माध्यम से नियुक्तियां केजरीवाल की अध्यक्षताा वाली समिति करेगी, लेकिन विवाद होने पर राज्यपाल का फैसला सर्वमान्य होगा।
माकन ने 'दिल्ली की बेहतरी के लिए लड़ाई' का वादा याद दिलाते हुए केजरीवाल से कहा, उम्मीद है वर्तमान मुख्यमंत्री शीला जी से सीख लेंगे।" उन्होंने केजरीवाल से अधिकारियों के साथ सम्मानपूर्वक बातचीत करने, संवाद करने और उन्हें दिल्ली की उन्नति के लिए काम करने को कहा।
उन्होंने ट्वीट किया, अधिकारी निश्चित रूप से आपके विजन के साथ काम करेंगे यदि ईमानदार हैं। आपके पिछले कार्य - असमय (ungodly hours) अधिकारियों को बुलाना, दुर्व्यवहार और कठोर शब्दों का सहारा लेना - रचनात्मक तरीके नहीं हैं।
माकन ने केजरीवाल से कहा, यह पहचानना अहम है कि इस तरह का व्यवहार केवल शहर में संकट पैदा करता है। उन्होंने कहा, शीला दीक्षित की सरकार के पहले छह साल सबसे शानदार थे।
बकौल माकन, शीला दीक्षित ने सत्ता के लिए नहीं, दिल्ली की बेहतरी के लिए संघर्ष किया। बिजली का निजीकरण, सीएनजी रूपांतरण, मेट्रो का शुभारंभ, फ्लाईओवर, अस्पताल, स्कूल निर्माण - ये तमाम काम इसलिए हुए क्योंकि शीला दीक्षित दिल्ली के लिए अथक संघर्ष करती रहीं।
माकन ने एक विशेष घटना को याद करते हुए कहा, परिवहन मंत्री के कार्यकाल के दौरान परिवहन आयुक्त को उनकी जानकारी के बिना हटा दिया गया था। आयुक्त को बदलने का फैसला उपराज्यपाल ने लिया और अपने आदेश को पलटने से इनकार भी कर दिया।
युवा कांग्रेस नेता के रूप में माकन उपराज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहते थे। वे बताते हैं, जब आयुक्त मामले में उन्होंने (माकन) प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विरोध का प्रयास किया, तो शीला दीक्षित ने ऐसा न करने की सलाह दी।
शीला दीक्षित ने माकन को सलाह दी, "हमारे असफल प्रयास के बारे में किसी को मत बताना। अधिकारियों को पता नहीं चलना चाहिए कि हमने कोशिश की और सफल नहीं हो सके। अगर उन्हें पता चल गया, तो वे हमें गंभीरता से लेना बंद कर सकते हैं।"
बकौल माकन, नेतृत्व और कूटनीति के उनके सबक मेरा मार्गदर्शन करते रहते हैं। शीला दीक्षित ने बाधाओं से कुशलता से निपटने, शहर के कल्याण पर फोकस के साथ सेवा करना सिखाया। जरूरत पड़ने पर चाय और पकौड़े देना और जरूरत पड़ने पर डटे रहना भी सिखाया।
उन्होंने कहा, "यह शीला जी की विरासत है, जो जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सेवा की मार्गदर्शिका है।" बकौल माकन, "मैं गर्व के साथ कहता हूं कि हम अपनी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को पूरी तरह से सीएनजी में बदलने वाले दुनिया के पहले शहर बने।"
माकन लिखते हैं कि परिवहन आयुक्त का घटनाक्रम उल्लेखनीय था। उन्होंने कहा, "नए अधिकारी ने स्थिति की गंभीरता को समझा। हम लॉबियों के खिलाफ एकजुट हुए और सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ अमेरिकी सरकार से भी प्रशंसा पाई।"
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में नौकरशाहों के तबादले पर केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ अन्य दलों का समर्थन जुटाने के लिए अरविंद केजरीवाल मुंबई दौरा कर सकते हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की योजना है।
इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में सीएम केजरीवाल के साथ बैठक की। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल को अध्यादेश से मिले अधिकार का विरोध कर AAP का समर्थन किया। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी दोनों की मीटिंग के दौरान मौजूद रहे।
बता दें कि गत शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे केंद्र सरकार ने 'स्थानांतरण पोस्टिंग, सतर्कता और अन्य प्रासंगिक मामलों' के संबंध में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) के लिए नियमों को अधिसूचित करते हुए अध्यादेश को गजट में प्रकाशित किया।
अध्यादेश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन करने के लिए लाया गया है। यह केंद्र बनाम दिल्ली मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार करता है।
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