CAG Report Delhi: दिल्ली शराब नीति के कारण 2,002 करोड़ का राजस्व घाटा: CAG रिपोर्ट
CAG Report Delhi: दिल्ली विधानसभा सत्र का दूसरा दिन हंगामे के साथ शुरु हुआ इसमें आप के 10 विधायकों को सदन से पूरे दिन के लिए निलंबित कर दिया गया है। आपको बता दें कि नई सीएम रेखा गुप्ता ने सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच 'एक्साइज पॉलिसी 2024' की रिपोर्ट सदन में कर दी है।।
इस रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में खत्म की गई शराब नीति के क्रियान्वयन की वजह से कुल 2,002 करोड़ रुपये का राजस्व घाटे की बात सामने आई है।

बता दें कि शराब नीति घोटाले में वित्तिय अनियमितताओं के कारण आप के शीर्ष नेताओं पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया गया था।
दिल्ली की नई भाजपा सरकार ने घोषणा की है कि वह विधानसभा सत्र के दौरान सभी 14 लंबित सीएजी रिपोर्टें पेश करेगी। इस बीच, शराब नीति पर कैग की रिपोर्ट पेश की गई जिसमें 2017-18 से 2020-21 तक चार सालों की रिपोर्ट शामिल है। इसमें इस बात का भी खुलासा किया गया है कि सरेंडर किए गए लाइसेंसों के लिए फिर से टेंडर जारी करने में असफल रही जिसके कारण दिल्ली सरकार को लगभग 890 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ, जबकि कार्रवाई में देरी के कारण जोनल लाइसेंसधारियों को दी गई छूट के कारण 941 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कोविड-19 प्रतिबंधों का हवाला देते हुए 28 दिसंबर 2021 से 27 जनवरी, 2022 के बीच के समय में लाइसेंसधारियों को दी गई 144 करोड़ रुपये की छूट दी गई थी जिसपर काफी हंगामा भी हुआ था। कैग ने कहा कि इस छूट के कारण आबकारी विभाग के राजस्व में और कमी आई है। इसके अलावा, क्षेत्रीय लाइसेंसधारियों से सुरक्षा जमा राशि की गलत वसूली के कारण 27 करोड़ रुपये की कमी आई।
रिपोर्ट में उल्लिखित कुछ अन्य प्रमुख अनियमितताएं इस प्रकार हैं:
लाइसेंस जारी करने में उल्लंघन
- ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार ने दिल्ली आबकारी नियम, 2010 के अंतर्गत नियम 35 का क्रियान्वयन नहीं की है जिसके अनुसार एक से अधिक लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाता है।
- लाइसेंस धारकों के लिए लाइसेंस सरेंडर करने से पहले कोई सुचना नहीं दी गई जिसके कारण आपूर्ति बाधित हुई।
- रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बीच, सरकार ने आबकारी नियमों और शर्तों की जांच किए बिना ही लाइसेंस जारी कर दिए।
इसमें कहा गया है, "यह पाया गया कि लाइसेंस ऋण शोधन क्षमता, लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण और बिक्री से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए बिना तथा आपराधिक पृष्ठभूमि का सत्यापन किए बिना जारी किए गए।"
आईएमएफएल के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता का अभाव
- सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ भारत निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) ब्रांडों की कीमत और बिक्री का विश्लेषण करने के बाद पता चला कि एक्स-डिस्टिलरी मूल्य (ईडीपी) के कारण बिक्री में गिरावट हुई जिसके कारण राजस्व की हानि भी हुई।
- आबकारी विभाग ने एल1 लाइसेंस धारकों को एक निश्चित स्तर से अधिक महंगी शराब के लिए ईडीपी घोषित करने की अनुमति दी थी। इस कारण एल1 लाइसेंसधारी को अपने लाभ के लिए शराब की कीमत में हेरफेर करने का मौका मिला।
अपर्याप्त गुणवत्ता नियंत्रण
- रिपोर्ट में कहा गया है कि कैग ने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जहां शराब परीक्षण रिपोर्ट भारतीय मानक ब्यूरो के तहत उल्लिखित निर्देशों के अनुरूप नहीं थीं।
- इस बात पर जोर दिया गया है कि विभिन्न ब्रांडों के लिए पानी की गुणवत्ता, मिथाइल अल्कोहल, सूक्ष्मजीवी पदार्थों की महत्वपूर्ण परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई और इनकी जांच भी मानक के अनुसार नहीं है।
- इसमें कहा गया है, "विदेशी शराब की 51 प्रतिशत जांच रिपोर्ट या तो एक वर्ष से अधिक पुरानी थीं या उनमें तारीख का उल्लेख नहीं था।"
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