CAG Report Delhi: कैग पर रण, कितने राज, कितने भ्रष्टाचार? जानिए देश में इस पर कब-कब मचा बवाल?
CAG Report Delhi: दिल्ली विधानसभा सत्र का दूसरा दिन हंगामे के साथ शुरु हुआ इसमें नेता प्रतिपक्ष आतिशी समेत आप के 21 विधायकों को सदन से 3 दिन के लिए निलंबित कर दिया गया है। आपको बता दें कि नई सीएम रेखा गुप्ता ने सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच 'एक्साइज पॉलिसी 2024' की रिपोर्ट सदन में कर दी है।।
इस रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार के पिछले 10 सालों का लेखा जोखा जनता के सामने होगा।बीजेपी की तरफ से इस रिपोर्ट में एक-दो नहीं बल्कि 14 अनियमितताओं के दावे किए जा रहे हैं।

क्या है कैग रिपोर्ट जिसपर इतना हंगामा मचा है? कैसे बनता है और किस आधार पर तैयार होता है आईए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं..
कैग रिपोर्ट क्या है?
सीएजी(Comptroller and Auditor General of India) एक ऐसी संवैधानिक संस्था है जो राज्य और केंद्र सरकार के खर्चे-पानी का हिसाब रखती है जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत बनाया गया है। इसका काम सार्वजनिक धन संरक्षण करना है जो यह तय करता है कि जनता टैक्स के रुप में जो पैसा दे रही है उस धन का सही से इस्तेमाल किया गया है या नहीं।
CAG सरकारों के खर्च किए गए लेखा-जोखा के अलावा सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों या उन संस्थाओं के सरकारी लेन-देन का भी हिसाब रखती है जिसमें सरकारी खजाने से कितना पैसा इन कंपनियों को दिया गया है।
इस रिपोर्ट पर इतना हंगामा क्यों ?
संवैधानिक रुप से देखा जाए तो हर साल CAG रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करना अनिवार्य है जिससे सरकारी खर्च में पारदर्शिता बनी रहे। जब दिल्ली में केजरीवाल सरकार थी तब उसने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान एक बार भी ये रिपोर्ट सदन में नहीं ले आई। बीजेपी सरकार से इस रिपोर्ट को सदन में पेश करने के लिए AAP पर दबाव बनाती रही। बीजेपी विधायक केजरीवाल सरकार पर 'शीशमहल' और 'शराब नीति' को लेकर हमला बोलते रहे हैं।
पहले से ही भ्रष्टाचार के मामले में कई आप नेताओं पर शिकंजा कसा है ऐसे में जब रेखा गुप्ता ने इस रिपोर्ट को सदन में पेश किया है तब AAP पर दबाव और बढ़ जाएगा। बीजेपी नेताओं का कहना है कि, इससे आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार के काले चिट्ठे खुलेंगे हालांकि आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक हमला बता रही है।
CAG Report पर कब-कब मचा हंगामा ?
देश में ये पहली बार इस रिपोर्ट पर हंगामा नहीं मच रहा है इससे पहले भी कई बार इस पर सियासी भूचाल आ चुका है।
2G स्पेक्ट्रम घोटाला: यूपीए सरकार के दौरान साल 2010 में सीएजी रिपोर्ट पेश किया गया जिसमें 2G स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में 1.76 लाख करोड़ रुपए सरकारी धन का घाटा हुआ था। इसके बाद बीजेपी ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया और 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान एक नैरेटिव के तौर पर इसे खूब भुनाया था।
कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला 2012:
साल 2012 में सीएजी ने संसद में एक और रिपोर्ट पेश की जिसमें कहा गया कि कोयला ब्लॉक का आवंटन मनमाने ढंग से किया गया जिसमें 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस घोटाले में मनमोहन सरकार पर उंगली उठी और 2014 में सुप्रिम कोर्ट ने 204 कोयला ब्लॉक का आवंटन रद्द कर दिया। इस घोटाले से कांग्रेस की छवी खराब हुई थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला: साल 2011 के सीएजी रिपोर्ट में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में भारी अनियमितताएं पाई गई थी। इसमें आयोजन समीति पर कई गंभीर आरोप लगे थे। इस रिपोर्ट पर कांग्रेस और दिल्ली की तत्कालीन सीएम शिला दीक्षीत पर बीजेपी ने जमकर निशाना साधा था।
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