सिंघु बॉर्डर: लखबीर सिंह की हत्या पर बोलीं मायावती- पीड़ित परिवार को 50 लाख और एक नौकरी दे सरकार
नई दिल्ली। हरियाणा-दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलनकारियों के मुख्य मंच के पास एक शख्स की क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई। उसकी पहचान पंजाब के तरनतारन जिले के चीमा खुर्द गांव के रहने वाले लखबीर सिंह के तौर पर हुई। वह 35-36 वर्ष का एक मजदूर था और अनुसूचित जाति से था। उसे निहंगों ने मारा था। उसकी हत्या पर बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने दुख जताया है। मायावती ने उसके परिजनों को आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है।
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मायावती ने ट्विटर के जरिए कहा कि, सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के दलित युवक की हत्या दुखद व शर्मनाक है। उन्होंने लिखा कि, हमारी माँग है कि पुलिस घटना को गंभीरता से ले और दोषियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई करे। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि, पंजाब के दलित मुख्यमंत्री भी इस घटना को गंभीरता से लें। लखीमपुर खीरी की तरह वे भी पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए की मदद व सरकारी नौकरी दें।

15 अक्टूबर की सुबह मृत मिला था लखबीर सिंह
हरियाणा-दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह 15 नवंबर की सुबह 5 बजे किसान आंदोलनकारियों के मुख्य मंच के पास बेरिकेड्स पर मृतावस्था में टंगा मिला था। हत्यारों ने उसके हाथ-पैर काट दिए थे। हत्या के बाद लाश को लोहे के बैरिकेड्स पर टांग गए थे। वहीं, बगल में उसका कटा हुआ हाथ भी टांग दिया। लाश दिखने पर वहां कोहराम मच गया। बाद में पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर अस्पताल पहुंचाया। जहां उसके पोस्टमॉर्टम की तैयारियां शुरू की गईं।

संयुक्त किसान मोर्चे का बयान आया
इस घटना पर संयुक्त किसान मोर्चा का बयान भी आया है। मोर्चे की ओर से कहा गया कि, घटनास्थल पर मौजूद निहंगों के एक समूह ने एक व्यक्ति की नृशंस हत्या की जिम्मेदारी ली है। निहंगों कहा कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि लखबीर ने 'सरबलोह ग्रंथ' की बेअदबी करने का प्रयास किया था।"
बताया गया है कि लखबीर कुछ समय से निहंगों के एक ही समूह के साथ रह रहा था। हालांकि, निहंगों ने उसे मार डाला। अब संयुक्त मोर्चे का कहना है कि, हमारा न तो निहंगों से कोई लेना-देना है और न ही मृतक से कोई परेशानी थी।

संयुक्त किसान मोर्चे ने हत्या की निंदा की
संयुक्त मोर्चे ने हत्या की निंदा भी की है। संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा, "हम किसी भी धार्मिक पाठ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ हैं, लेकिन ये मामला किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता। हम मांग करते हैं कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिले।"












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