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Delhi Ordinance: BJP ने स्वागत किया, अध्यादेश के समर्थन में 'विदेशी मेहमान, राजदूत' जैसी दलीलें दिलचस्प

Delhi Ordinance GNCTD Transfer posting मामलों में उपराज्यपाल (LG) को ताकत देता है। नियुक्ति या ट्रांसफर पर विवाद की स्थिति में अंतिम फैसला LG का ही मान्य होगा। भाजपा ने इसका स्वागत किया है। AAP विरोध में है।

Delhi Ordinance

Delhi Ordinance GNCTD Transfer posting मामलों में उपराज्यपाल (LG) को ताकत देता है। नियुक्ति या ट्रांसफर पर विवाद की स्थिति में अंतिम फैसला LG का ही मान्य होगा। भाजपा ने कहा है कि इस फैसले का स्वागत होना चाहिए।

दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र के अध्यादेश पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, दिल्ली देश की राजधानी है, इस पर पूरे भारत का अधिकार है और काफी समय से दिल्ली की प्रशासनिक गरिमा को अरविंद केजरीवाल सरकार ने ठेस पहुंचाई है।

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में तबादले, पोस्टिंग, सतर्कता और अन्य प्रासंगिक मामलों में लाए गए अध्यादेश का स्वागत करते हुए भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, इस सरकार के भ्रष्टाचार ने भी दिल्ली को बहुत शर्मिंदा किया है।

भाजपा ने कहा, पिछले एक हफ्ते में जिस तरह से अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के प्रशासन को बदनाम करने और मनमानी करने की कोशिश की, इन परिस्थितियों में भाजपा अध्यादेश का स्वागत करती है।

भाजपा के आधिकारिक बयान में कहा गया, 'दुनिया के हर देश के राजदूत दिल्ली में रहते हैं और यहां जो भी प्रशासनिक गड़बड़ी होती है, उससे भारत की गरिमा पूरी दुनिया में धूमिल होती है।'

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को "स्थानांतरण पोस्टिंग, सतर्कता और अन्य प्रासंगिक मामलों" के संबंध में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) के लिए नियमों को अधिसूचित करने के लिए एक अध्यादेश रात करीब 11 बजे लाया।

अध्यादेश को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन करने के लिए लाया गया है। यह केंद्र बनाम दिल्ली मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार करता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने गत 11 मई के फैसले में माना था कि यदि प्रशासनिक सेवाओं को विधायी और कार्यकारी डोमेन से बाहर रखा गया है, तो मंत्रियों को उन सिविल सेवकों को नियंत्रित करने से बाहर रखा जाएगा जिन्हें कार्यकारी निर्णयों को लागू करना है।

अदालत ने साफ किया कि राज्यों के पास भी शक्ति है लेकिन राज्य की कार्यकारी शक्ति संघ के मौजूदा कानून के अधीन होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्यों का शासन संघ (Union या केंद्र सरकार) द्वारा अपने हाथ में न ले लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार के लोकतांत्रिक रूप में, प्रशासन की वास्तविक शक्ति निर्वाचित सरकार के पास होनी चाहिए। यदि लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को अधिकारियों को नियंत्रित करने की शक्ति नहीं दी जाती है, तो जवाबदेही की तिहरी श्रृंखला (triple chain of accountability) का सिद्धांत बेमानी हो जाएगा।

CJI डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह, कृष्ण मुरारी, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस साल 18 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बता दें कि 2014 में आम आदमी पार्टी (आप) के सत्ता में आने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी के शासन में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच सत्ता संघर्ष देखा गया है। मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने केंद्र सरकार के एक अनुरोध पर इसे एक बड़ी पीठ को भेजने का फैसला लिया। इसके बाद केस संविधान पीठ के समक्ष पोस्ट किया था।

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