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Law Ministry Ordinance से SC का आदेश बेअसर! मोदी सरकार ने 10 दिन के भीतर बदले नियम

दिल्ली के प्रशासन औऱ अधिकारियों के तबादले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 10 दिन के भीतर आज केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर तबादले औऱ विजिलेंस जैसे मामलों में कानून का संशोधन कर दिया। इससे कोर्ट का आदेश बेअसर हो जाएगा।

Law Ministry Ordinance

Law Ministry Ordinance के सहारे कानून बदलने जा रही है। मोदी सरकार के कानून मंत्रालय ने ये अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को बेअसर करने के लिए पेश किया है, जिसमें दिल्ली के प्रशासन पर केजरीवाल सरकार को अधिकार दिया गया था।

करीब 9 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि दिल्ली में अफसरों के तबादले और नियुक्ति के संबंध में अधिकार दिल्ली सरकार के होंगे। उपराज्यपाल सीएम यानी सरकार या कैबिनेट की सलाह पर काम करेंगे। इस फैसले को दिल्ली की AAP सरकार ने बड़ी जीत बताया था।

अब जबकि केंद्र सरकार ने अध्यादेश का सहारा लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कथित तौर पर नकारने का प्रयास किया है, ये मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचेगा।

दरअसल, केंद्र सरकार ने जो अध्यादेश जारी किया है, इसके अनुसार दिल्ली में 'राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण' का गठन होगा। इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और गृह सचिव शामिल होंगे।

अब दिल्ली सरकार में सेवारत समूह 'ए' अधिकारियों और DANICS अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग पर निर्णय प्राधिकरण में लिया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि "मतभेद की स्थिति में उपराज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा।"

क्या बेअसर हो जाएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, अध्यादेश को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन करने के लिए लाया गया है। इससे केंद्र बनाम दिल्ली मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार किया जा सकेगा।

कानून और न्याय मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा, "राष्ट्रीय राजधानी के रूप में इसकी विशेष स्थिति को देखते हुए, संसदीय कानून द्वारा प्रशासन की एक योजना तैयार की जानी है, जो स्थानीय और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक हितों को संतुलित करने के लिए है।"

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    अध्यादेश की भूमिका में कहा गया है कि दिल्ली का प्रशासन भारत सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) की संयुक्त और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।

    अध्यादेश के अनुसार, दिल्ली में 'राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण' (NCSSA) का गठन होगा। केंद्र ने इसी मकसद से एक अध्यादेश पारित किया गया है। इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और गृह सचिव शामिल रहेंगे।

    अधिसूचना में अनुच्छेद 239AA के प्रावधानों के पीछे मंशा और उद्देश्य को प्रभावी करने की दृष्टि से, दिल्ली में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक स्थायी प्राधिकरण का गठन किया गया है।

    10 पन्ने का Law Ministry Ordinance, नीचे पढ़िए

    बयान में कहा गया, प्राधिकरण मुख्य सचिव, GNCTD के साथ GNCTD के अधिकारियों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रशासन के प्रमुख और प्रधान सचिव गृह विभाग, जीएनसीटीडी को स्थानांतरित पोस्टिंग, सतर्कता और अन्य प्रासंगिक मामलों से संबंधित मामलों के बारे में उपराज्यपाल को सिफारिशें कर सकेगा।"

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