फैबिफ्लू विवाद: आप के जमाखोरी के आरोपों पर बोले गौतम गंभीर-जरूरमंदों को मुफ्त दवा देना क्या जमाखोरी है?
नई दिल्ली, अप्रैल 22: कोरोना ने पूरे देश में कहर बरपा रखा है।अस्पतालों में बेड, ऑक्सीनज और दवाइयों की कमी से हजारों लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ रही है। पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के सांसद गौतम गंभीर ने अपने संसदीय क्षेत्र में कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टैबलेट 'फैबीफ्लू' को मुफ्त बांट रहे हैं। जिसके बाद दिल्ली आम आदमी पार्टी ने गौतम गंभीर पर जमाखोरी का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि, जो दवा लोगों को मिल नहीं पा रही है, वह उनके पास इतनी बड़ी मात्रा में कैसे उपलब्ध है।
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अब गौतम गंभीर ने आम आदमी पार्टी के आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि, यदि किसी वितरक से प्राप्त की गई फैबिफ्लू के कुछ 100 पत्ते जरूरतमंदों को मुफ्त में दी जा रही है तो क्या इसे जमाखोरी कहा जा सकता है? लोगों को यह दवाई नहीं मिल रही है, काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। अगर ये दवाई मुफ्त वितरण कर लोगों की जान बचाने में मदद की है तो इसमें गलत क्या है।
गंभीर ने आगे कहा कि, कहने वाले मुझे गलत कह सकते हैं, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए मैं सब कुछ करूंगा। आप पर निशाना साधते हुए गंभीर ने कहा कि, जिन्होंने रेमडेसिवीर की 30,000 रुपये से अधिक की कीमत पर कालाबाजारी होने दी और अस्पताल बेडों को दिल्ली में 5-10 लाख में बिकने दिया, वे इस बात से चिंतित हैं कि फैबिफ्लू के कुछ पत्ते गरीबों को मुफ्त में दिए जा रहे हैं। ये "जमाखोरी" की उनकी समझ है। इंसानी जीवन का महत्व है।
गंभीर ने कहा कि दिल्ली मेरा घर है और मैं अपनी आखिरी सांस तक लोगों की सेवा करता रहूंगा। बेड, ऑक्सीजन और दवाई के लिए लोग परेशान हैं। हम लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव मदद कर रहे हैं। वहीं इससे पहले गौतम गंभीर ने बुधवार को ट्वीट किया था कि पूर्वी दिल्ली के लोग उनके कार्यालय जागृति एन्कलेव से 10:00 बजे से पांच बजे तक फैबिफ्लू मुफ्त में ले सकते हैं। इसके लिए अपना आधार कार्ड और डॉक्टर की पर्ची साथ लेकर आने की बात कही थी।












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