दिल्ली सरकार बनाम उप-राज्यपाल: चिदंबरम रखेंगे सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल का पक्ष

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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार की पैरवी करेंगे। केजरीवाल सरकार ने उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक मुखिया बताने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। दिल्ली सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखने वाले सीनियर वकील और पूर्व गृहमंत्री पी  उन नौ वकीलों में से एक होंगे, जो पांच जज वाली संविधान पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार का पक्ष रखेंगे। एक टीवी चैनल से बातचीत में चिदंबरम ने इस मामले पर कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत के संविधान में उपराज्यपाल को सुप्रीम शक्ति बनाया गया है और दिल्ली की सरकार एक शक्तिहीन इकाई है।

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उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ में प्रधान न्यायाधीश मिश्रा के अलावा न्यायमूर्ति एके सीकरी, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी हैं।

दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने पीठ को बताया कि अपनी याचिका में वह दिल्ली उच्च न्यायालय के चार अगस्त, 2016 के फैसले को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताया गया है। दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश भी है। उन्होंने कहा कि इसमें अनुच्छेद 239एए को चुनौती दी गयी है। इस अनुच्छेद के तहत दिल्ली को विशेष दर्जा दिया गया है। शीर्ष न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली आप सरकार की याचिकाओं को 15 फरवरी को संविधान पीठ के पास भेज दिया था। गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली राज्य नहीं है और उपराज्यपाल उसका प्रशासनिक प्रमुख है।

आपको बता दें कि संविधान पीठ संविधान में संशोधन नहीं करती बल्कि जिन मुद्दों पर संविधान मौन है, उनकी व्याख्या करती है। इस मामले में संविधान के आर्टिकल 239AA की व्याख्या करनी है। इसके मुताबिक दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश होगा जिसकी अपनी विधानसभा और मुख्यमंत्री होंगे। दिल्ली के प्रशासक उपराज्यपाल होंगे जो राष्ट्रपति की ओर से काम करेंगे। उपराज्यपाल मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की मदद और सलाह से निर्णय करेंगे। लेकिन कहीं ये नहीं लिखा है कि वे इनकी सलाह मानने को बाध्य होंगे। अगर उपराज्यपाल और मंत्रिमंडल के बीच किसी मुद्दे पर असहमति होगी तो उपराज्यपाल मामले को राष्ट्रपति के पास भेजेंगे और उनका फैसला बाध्यकारी होगा। दिल्ली विधानसभा के पास भूमि, लॉ एंड आर्डर और पुलिस का अधिकार नहीं होगा।

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Arvind kejriwal delhi LG P chidambaram Supreme court aap government
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