बड़ी बहन ने अपना लीवर डोनेट कर बचाई 115 किलो के भाई की जान
नई दिल्ली। भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी यह रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली से अच्छी खबर आई। एक बहन ने अपने छोटे भाई को लीवर डोनेट कर उसे बचाया। वह भाई 115 किलो का हो चुका था। डॉक्टरों ने कहा- लीवर फैलियर से पीड़ित उस भाई के पास जीने को 3 माह ही थे, अगर उसे बहन ने ना बचाया होता। वह पीलिया, रीनल की समस्या, पेट में पानी होने और लीवर फैलियर की गंभीर कोगुलोपैथी से पीड़ित था। यहां अस्पताल में सर्जरी के समय उसका बिलीरुबीन लेवल 15 था और ट्रांसप्लांट के बाद अब 4 है।

बहन ने भाई के लिए अंगदान किया
सुखद अहसास यह भी है कि, भाई और बहन दोनों स्वस्थ हैं। डॉक्टरों का कहना है कि, मरीज मोटे होने के अलावा पिछले 2 से 3 महीने से बहुत ज्यादा बीमार था। उसका खून नहीं जम रहा था। हालत ऐसी थी कि लीवर को 3 महीने के अन्दर ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता तो उसकी जान चली जाती। वहीं, हमें चिंता की बात यह लगी कि उसके लिए उसकी साइज का लीवर लाना मुश्किल था। मरीज के परिजन इसपर सोच-विचार कर रहे थे। तभी मरीज की बहन ने कहा- मैं भाई को बचाउंगी।

115 किलो हो चुका था उसका वजन
बहन खुद भाई के लिए लीवर दान करने के लिए आगे आई, हालांकि सवाल तो अब भी बना हुआ था कि, उस लीवर का साइज भारी-भरकम मरीज के अंदर फिट नहीं बैठ रहा था। फिर लीवर को फिट करने का इंतजाम किया गया। इस तरह सफलतापूर्वक लीवर ट्रांसप्लांट हुआ। यहां बात हो रही है, आकाश हेल्थकेयर हॉस्पिटल की। यहीं पर, एक बहन ने अपना लीवर डोनेट कर 115 किलो के भाई की जान बचाई। आकाश हेल्थकेयर के लीवर ट्रांसप्लांट डायरेक्टर डॉ. अजिताभ श्रीवास्तव ने कहा कि, यह लीवरडोनेशन समाज में भाई-बहन के आपसी प्यार को और बढ़ाने वाला है।

समाज के लिए यह प्रेरक रहेगा
डॉ. अजिताभ श्रीवास्तव ने कहा कि, अब दोनों भाई-बहन स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि, हम लोगों को यह भी बताना चाहते हैं कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति बिना किसी समस्या के अपने लीवर को दान कर सकता है। जिस मरीज को यहां ठीक किया गया, वह पीलिया, रीनल की समस्या, पेट में पानी होने और लीवर फैलियर की गंभीर कोगुलोपैथी से पीड़ित था। मोटापा उसकी सबसे प्रमुख समस्या थी, और वजन भी 115 किलो था।












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