Glass Bridge in UP: चित्रकूट में बनेगा चीन जैसा शीशे का पुल, ग्लास ब्रिज की खासियत जानकर हो जाएंगे हैरान
ग्लास स्काईवॉक से नीचे जंगल का नजारा भी दिखेगा। ग्लास वॉक पूरा होने के बाद इस जगह पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी चित्रकूट में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यूपी सरकार ने रानीपुर वन्यजीव विहार को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की सौगात दी है। वहीं इको टूरिज्म के क्षेत्र में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए जिले के मानिकपुर प्रखंड के मारकुंडी वन एरिया के ग्राम टिकरिया के पास तुलसी जलप्रपात पर पहला कांच का पुल बनाने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है।

प्राकृतिक झरने को देखने आने वाले सैलानियों के साथ-साथ क्षेत्र के लोग ग्लास ब्रिज के मास्टर प्लान को लेकर काफी खुश है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि डकैतों के खात्मे के बाद यूपी सरकार की सकारात्मक सोच ने एरिया में विकास को नई उड़ान दी है। यह उत्तर प्रदेश का अनूठा कांच पुल होगा। जिसे देखने के लिए दूसरे राज्यों से भी लोग धार्मिक नगरी चित्रकूट पहुंचेंगे। इससे पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
वहीं, चित्रकूट के डीएम अभिषेक आनंद ने जानकारी दि कि उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा ईको टूरिज्म के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। रानीपुर टाइगर रिजर्व में गेट सहित गेस्ट हाउस बनाने का कार्य चल रहा है। वहीं जलप्रपात में बायोडायवर्सिटी पार्क के साथ ग्लास स्काई ब्रिज बनाने का कार्य किया जा रहा है। यह उत्तर प्रदेश का पहला कांच का पुल होगा। जिसे बिहार के राजगीर की तर्ज पर बनाया जाएगा।
झरने को पास से निहार सकेंगे पर्यटक
पुलिस ने तेज बहाव से चलने वाले झरने के पास जाने से रोक लगा दी है। अब सैलानियों को जलप्रपात का नजारा दूर से ही देखना पड़ता है। हालांकि कांच का पुल बन जाने के बाद सैलानी को झरने के बीच में पहुंचने का मौका मिलेगा। जो बेहद रोमांचक होगा। मास्टर प्लान के मुताबिक इस कांच के पुल के अंत में बनी गुफा में एक बार में करीब 15 सैलानी पहुंच सकेंगे। जबकि यह कांच का पुल करीब 30 फीट की ऊंचाई से गिरने वाले झरने के पास पहुंचाएगा।

बीहड़ क्षेत्र का होगा विकास
कोल भील आदिवासी गांवों से घिरे इस झरने का नाम आदिवासी सबरी के नाम पर सवारी जल प्रपात रखा गया है। झरने तक पहुँचने से पहले यहाँ सबरी नाम का एक मंदिर भी बनाया गया था। हालांकि बीते महीने इस मास्टर प्लान के तैयार होने से पहले ही झरने का नाम सबरी जलप्रपात की जगह तुलसी जलप्रपात कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश का इकलौता शीशे का पुल के बनने से ईको-टूरिज्म पसंद करने वाले सैलानियों के आने से बीहड़ क्षेत्र का विकास होगा। इतना ही नहीं धार्मिक नगरी होने के कारण चित्रकूट के मंदिरों में लाखों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। आपको बता दें कि धर्मनगरी चित्रकूट का मानिकपुर विकासखंड क्षेत्र ददुआ, ठोकिया गिरोह,बबली, गौरी यादव जैसे कई डकैतों के प्रभाव को लेकर चर्चा में रहा है।












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