Lok Sabha Ground Report: छिंदवाड़ा में ढाई सौ से ज्यादा बूथों पर भाजपा मजबूत स्थिति में, क्या बदलेंगे समीकरण
chhindwara Lok Sabha Seat: लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा सीट जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। मध्य प्रदेश की हॉट सीट पर पिछले कई सालों से कांग्रेस के नाथ परिवार का कब्जा है। लेकिन इस बार इस सीट पर कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है।
भाजपा ने इस सीट को जीतने के लिए अपने सबसे अनुभवी नेता और मध्य प्रदेश शासन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को इस सीट की जिम्मेदारी सौंपी है। वन इंडिया की टीम छिंदवाड़ा में ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से यह जाने की कोशिश कर रही है कि क्या भाजपा इस बार सेट को जीतने में कामयाब रहेगी या फिर नाथ परिवार अपनी साख बचा पाएगा।

250 से ज्यादा बूथों पर मजबूत स्थिति में भाजपा
बता दे 2013 के बाद हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कुल 1934 बूथों में भाजपा ढाई सौ बूथ ऐसे है जिस पर भाजपा कभी नहीं हारी है। वहीं कांग्रेस 497 बूथों पर मजबूत स्थिति में है। इस सीट को जीतने के लिए खास रणनीति तैयार की है और इसी के लिए उसने बूथों को ग्रेड में बांट दिया है। इनमें सबसे ज्यादा करीब 37% बूथ को ग्रेड C में रखा गया। यहां पर भाजपा कांग्रेस के बराबर स्थिति में है। इसके अलावा दी ग्रेट में करीब 26% बूथों को रखा गया, जहां पर भाजपा बेहद ही कमजोर स्थिति में है और उसे इन्हें जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी है।
छिंदवाड़ा लोकसभा सीट को जीतने के लिए भाजपा भले ही पूरा जोर लगा रही हो लेकिन यहां पर सियासी समीकरण कुछ अलग ही नजर आते हैं। बता दे 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस को 50 फीसदी वोट मिले थे,जबकि भाजपा का वोट शेयर 40 फीसदी रहा था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटा और भाजपा का बढ़ा था। 2019 में कांग्रेस को 47.70% और भाजपा को 45.09% वोट मिले थे। यही वजह है कि भाजपा अभी सेट को जीतने का दावा कर रही है।

सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर पर लोगों ने बताया नकुलनाथ और बंटी साहू में कांटे की टक्कर
सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर पर वन इंडिया से चर्चा के दौरान छिंदवाड़ा के स्थानीय नागरिक धर्मेश ऊइके ने बताया कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के विकास के लिए बहुत काम किया है उसे बताने की जरूरत नहीं है आप छिंदवाड़ा को देखकर समझ लेंगे कि कितना विकास का कार्य हुआ है। लेकिन इस बार नकुलनाथ का जीतना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि उनकी जनता से कनेक्टिविटी बहुत ही काम है। उन्होंने बताया कि अगर चुनाव में कमलनाथ उम्मीदवार होते तो उनको हराना भाजपा के लिए असंभव होता।

वही एक और स्थानीय नागरिक दीपेश सक्सेना ने बताएं कि यहां पर नकुलनाथ को हराना भाजपा के लिए उतना आसान नहीं है, जितना बीजेपी के नेता दावा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के लिए जो कार्य किया है, उसे छिंदवाड़ा की जनता देख रही है। इसलिए उन्हें हराना मुश्किल है। वही करने नागरिक शानू ने बताया कि छिंदवाड़ा कमलनाथ जी का घर है। और हम परिवार के लोग हैं इसलिए उनका चुनाव में पूरा सहयोग करेंगे। भाजपा के बड़े नेता यहां लगातार दिखाई दे रहे हैं इस वजह से यहां मुकाबला कांटे का दिखाई दे रहा है।
सिर्फ एक बार बीजेपी सीट पर जीत सकी है
साल 1992 में अस्तित्व में आई छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर भाजपा सिर्फ एक बार जीत दर्ज कर सकी है यदि 1997 का उपचुनाव छोड़ दे तो यहां पर हमेशा कांग्रेसी चुनाव जीती है। 1997 के उप चुनाव में कमलनाथ को यहां से पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने चुनाव हरा दिया था।
बीजेपी ने छिंदवाड़ा लोकसभा सीट को जीतने के लिए अपनी विकास और कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार किया है। यहां बताए गए आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि बीजेपी ने यहां के निवासियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। वे लोकसभा सीट पर जीत पाने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं, जैसे कि अपने कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाना और विभिन्न चुनावी रणनीतियों का उपयोग करना।

छिंदवाड़ा में कांग्रेस की अपनी पकड़ मजबूत
छिंदवाड़ा में कांग्रेस भी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने अपने प्रमुख नेताओं को छिंदवाड़ा में भेजा है और अपने पक्ष में जनसमर्थन बढ़ाने की कोशिश की है। इसे देखते हुए, यह चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धा का रूप ले रहा है। छिंदवाड़ा के निवासियों के वोट के खातिर दोनों पार्टियों ने अपने प्रयासों को दोगुना किया है। चुनावी परिणाम यह बताएंगे कि इस बार कौन सी पार्टी छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर विजयी होती है।












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