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छत्तीसगढ़ में गोबर से बिजली बनाने की योजना पर काम शुरू, प्रोजेक्ट के तहत किये गए 5 MOU

छत्तीसगढ़ में गोबर से बिजली बनाने की योजना पर काम शुरू, प्रोजेक्ट के तहत किये गए 5 MOU

रायपुर ,15 फरवरी। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार की चर्चित गौधन न्याय योजना से जुड़े गोबर से बिजली बनाने प्रोजेक्ट में अब तेजी नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने गोबर से बिजली बनाने के लिए प्लांट लगाने के संबंध काम शुरू कर दिया है, इसके लिए अब तक 5 युवा उद्यमियों ने एमओयू किया गया है।मंत्री रविन्द्र चौबे का कहना है कि गौठानों को ग्रामीणों के आजीविका के केन्द्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है।

गोबर से बिजली बनाने के काम में तेजी

गोबर से बिजली बनाने के काम में तेजी

गोबर से बिजली बनाने के लिए सामने आये उद्यमियों की तरफ से गौठानों में प्रोजेक्ट के लिए 10-10 करोड़ रूपए का निवेश प्रस्तावित है। बिजली उत्पादन के लिए गौठानों में खरीदे जाने वाले गोबर का उपयोग उद्यमियों की प्राथमिकता से किया जाएगा।सरकार डेयरी फार्म के गोबर और शहर में एकत्र होने वाले वेस्टेज का भी उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करेगी।

कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने गोधन न्याय मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने के साथ गौठानों के जरिये आय पैदा करने वाली गतिविधियों को तेजी लाने के लिए निर्देश जारी किये हैं। मंत्री रविन्द्र चौबे का कहना है कि गौठानों को ग्रामीणों के आजीविका के केन्द्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट सहित बाकि के उत्पादों के मार्केटिंग और विक्रय की बेहतर व्यवस्था बनाये रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए है ,ताकि किसान गौठानों से सीधे वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट खाद का उठाव कर सके।

गौठानों को बनाया जा रहा है रूरल इंडस्ट्रियल पार्क

गौठानों को बनाया जा रहा है रूरल इंडस्ट्रियल पार्क

वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा ने कहा कि गौठानों के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क से इच्छा रखने वाले युवा उद्यमियों को जोड़ा जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा मिल सके। गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. एस. भारतीदासन ने बताया कि मिशन के काम को गति देने के लिए 11.56 करोड़ रूपए का वार्षिक बजट प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि मिशन के काम-काज की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन, ग्रामोद्योग सहित कई विभागों से अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाएगी।

गौठानों के जरिये संचालित होती है योजना

गौठानों के जरिये संचालित होती है योजना

भारतदासन ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 10,591 गौठान से स्वीकृत किए गए हैं। जिसमें से 8,048 गौठान निर्मित और संचालित हैं। गौठानों में गोबर बेचने के लिए 2.87 लाख ग्रामीण पशुपालक पंजीकृत हैं, जिसमें से 2.04 लाख गोबर बेच कर फायदा उठा रहें हैं। उन्होंने बताया कि गौठानों में 62.60 लाख क्विंटल गोबर खरीदने के एवज में 125.22 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है,जिससे 2549 गौठान स्वावलंबी हो गये हैं।

जुलाई 2020 में शुरू हुई थी गौधन न्याय योजना

जुलाई 2020 में शुरू हुई थी गौधन न्याय योजना

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार ने मुख्यमंत्री गोधन न्याय योजना चला रखी है। इस योजना के जरिये सरकार पशुपालकों से गौवंश का 2 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदती है। भूपेश बघेल सरकार ने इस योजना को जुलाई 2020 से प्रारंभ किया था। राज्य सरकार किसानों से गोबर खरीदकर उससे वर्मी कंपोस्ट खाद बनाती है। अब सरकार ने योजना में विस्तार करते हुए खरीदे गए गोबर से बिजली बनाने का काम भी शुरू कर दिया है।

यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़ में बिजली बिल के साथ बिजली भी हाफ, बिजली कटौती के मामले में शीर्ष 5 राज्यों में शामिल है छत्तीसगढ़

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