पर्यटकों को लुभाएगा छत्तीसगढ़ के मैनपाट में बना "ट्राइबल विलेज", सरगुजिहा संस्कृति की दिखेगी झलक

अम्बिकापुर, 27 सितम्बर। मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। पर्यटन के लिहाज से मैनपाट का वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता बेहद खास है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत सरगुजा जिले के मैनपाट में 21 करोड़ की लागत ट्रायबल विलेज का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।। आज विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर आपके लिए यह एक अच्छी खबर है की आने वाले पर्यटन सीजन में पर्यटकों के लिए इस ट्राइबल विलेज की शुरुआत कर दी जाएगी। आइए आपको बतातें हैं कि इस आखिर इस ट्राइबल विलेज की खासियत क्या होगी ?

20 एकड़ में आकार ले रहा ट्राइबल विलेज

20 एकड़ में आकार ले रहा ट्राइबल विलेज

अम्बिकापुर के मैनपाट के कमलेश्वरपुर में ट्राइबल विलेज के लिए सरकार ने 43 एकड़ भूमि दी है। लेकिन फिलहाल 20 एकड़ में लगभग 21 करोड़ की लागत से इसे तैयार किया जा रहा है। मैनपाट में बनने वाले इस ट्राइबल विलेज को पर्यटकों के लिए खास होगा। यहां पर पर्यटकों को 21 कॉटेज पर ठहरने की सुविधा मिलेगी। भव्य प्रवेश द्वारा के साथ यहां स्वीमिंग पुल भी बनाया गया है।

स्वदेश दर्शन योजना के तहत किया गया निर्माण

स्वदेश दर्शन योजना के तहत किया गया निर्माण

दरअसल यह पूरा निर्माण केंद्र सरकार के स्वदेश दर्शन योजना के तहत किया जा रहा है। फेस वन के तहत अम्बिकापुर के मैनपाट में निर्माण कार्य शुरू किया गया था। मैनपाट के इस ट्राइबल विलेज को "एको एथनिक डेस्टिनेशन" के रूप में तैयार किया गया है। जहाँ सभी पर्यटन सुविधाएं मुहैया कराई गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के अन्य आठ जिलों में "इको टूरिज्म सर्किट" बनाने के लिए प्रदेश सरकार को 94.23 करोड़ की राशि प्रदान की गई थी।

पर्यटकों को मिलेगा छत्तीसगढ़ी अंदाज में रहने का मौका

पर्यटकों को मिलेगा छत्तीसगढ़ी अंदाज में रहने का मौका

पर्यटकों के ठहरने के लिए कॉटेज की सुविधा के साथ साथ उन्हें यहां ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में खाने पीने का आनंद मिल सकेगा। यहां एक स्विमिंग पूल भी बनाया गया है। इसके साथ एक प्राकृतिक झील है। जिसकी सुंदरता शाम को और भी बढ़ जाती है। ट्राइबल विलेज को पूरी तरह स्थानीय संस्कृति और रहन-सहन के हिसाब से तैयार किया गया है, जहां पर्यटक सरगुजिहा संस्कृति बीच रह सकते हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के निर्देशन में ट्रायबल विलेज का निर्माण कराया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ का शिमला है सरगुजा का मैनपाट

छत्तीसगढ़ का शिमला है सरगुजा का मैनपाट

दरअसल छत्तीसगढ़ का शिमला शिमला कहे जाने वाले इस मैनपाट में प्रकृति मेहरबान है, यहां बौद्ध धर्म के अनुयायी, तिब्बत से आकर के सालों शरणार्थी के रूप में निवास कर रहें हैं। इसके साथ ही यहां घूमने के लिए कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिससे आप यहां पर अपनी पूरी थकान मिटा सकते हैं। यहां बौद्ध मंदिर, एलिफेंट पॉइंट, उल्टा पानी, दलदली क्षेत्र, टाइगर प्वाइंट, मेहता पॉइंट, मछली पॉइंट, सनसेट, जलपरी, जैसे स्थल हैं।

दिसम्बर तक शुरू हो जाएगा ट्रायबल विलेज

दिसम्बर तक शुरू हो जाएगा ट्रायबल विलेज

आगामी पर्यटन सीजन से पहले ही इस ट्राइबल विलेज को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। वहीं पर्यटन मंडल की जन सम्पर्क अधिकारी अनुराधा दुबे ने बताया मैनपाट में ट्रायबल विलेज का काम पूरा हो चुका है। यहां सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। एक माह के भीतर इसे शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका संचालन पर्यटन मंडल ही करेगा। पहले यहां कॉटेज का किराया निर्धारित किया जाएगा। यहां पर्यटकों को छत्तीसगढ़िया संस्कृति के साथ साथ सरगुजिहा संस्कृति देखने को मिलेगी।

इको टूरिस्म सर्किट में शामिल हैं यह 13 सेंटर

इको टूरिस्म सर्किट में शामिल हैं यह 13 सेंटर

मैनपाट के अलावा छत्तीसगढ़ के अन्य आठ जिलों में भी इस योजना के पहले फेस के तहत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। जिसमें मैनपाट को सबसे सुंदर और सर्वसुविधायुक्त बताया जा रहा है। जैसे जशपुर, कुनकुरी, कमलेश्वर पुर , मैनपाट महेशपुर, कुरदर, सरोदा दादर, गंगरेल, नथियानवागांव कोंडागांव , जगदलपुर , चित्रकूट, तीरथगढ़ को ट्रायबल टूरिस्म सर्किट के रूप में तैयार किया गया है। वही योजना के दूसरे फेस के तहत "इको टूरिज्म सर्किट" की कार्य योजना तैयार कर ली गई है।इस सर्किट में चिल्फी घाटी, अचानकमार, अमरकंटक घाटी एवं हसदेव बांगो डैम के सीमावर्ती क्षेत्र को शामिल किया गया है, इस योजना की लागत लगभग 81.26 करोड़ है।

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