Sukma News: सुकमा में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को कैसे बनाया निशाना? पूरी घटनाक्रम समझिए
सुकमा-बीजापुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर बॉर्डर पर शनिवार को नक्सलियों की ओर से घात लगाकर किए गए हमले में अबतक सुरक्षाबलों के 22 जवानों के शहीद होने की पुष्टि हो चुकी है और एक अभी भी लापता है। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के साथ हुए एक एनकाउंटर के बाद इस भयानक वारदात को अंजाम दिया है, जिसमें 31 जवान घायल भी हुए हैं और 15 से ज्यादा नकस्लियों के भी मारे जाने की खबर है। सबसे बड़ी बात है कि नक्सली की ओर से जवानों के पार्थिव शरीरों से बुलेटप्रूफ जैकेट और उनके जूते तक उतारकर ले जाने की बातें सामने आ रही हैं। उनके पास इतने अत्याधुनिक हथियार थे कि उन्होंने सुरक्षा बलों को एक तरह से घेर लिया था।

25 लाख का इनामी हिडमा ने दिया वारदात को अंजाम
शनिवार को सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ में बस्तर के जंगलों के दक्षिण सुकमा और बीजापुर जिलों की सीमा पर नक्सलियों के खिलाफ अलग-अलग लेकिन संयुक्त अभियान शुरू किया था। इस अभियान में सुरक्षा बलों के 2000 से ज्यादा जवान शामिल थे (एनडीटीवी के मुताबिक)। जिस इलाके में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, उसे माओवादियों का गढ़ समझा जाता है। लगता है कि माओवादियों को इस ऑपरेशन की भनक पहले ही लग गई थी। दिन के करीब 12 बजे उन्होंने सिक्योरिटी फोर्स पर घात लगाकर हमला बोल दिया, जिसके जवाब सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा खोल दिया। यह एनकाउंटर तीन घंटे से लेकर 5 घंटे के बीच चला। दोनों ओर से जबर्दस्त फायरिंग हुई। दरअसल, राज्य के सुरक्षा बलों को पिछले 10 दिनों से कुख्यात नक्सली माड़वी हिडमा के इलाके में मौजूद होने की सूचना मिल रही थी। यह प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) का सदस्य है, जिसपर कई बड़े नक्सली वारदातों में शामिल होने का आरोप है और उसके सिर पर 25 लाख रुपये का इनाम भी है।
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एलएमजी और रॉकेट लॉन्चर का भी इस्तेमाल
शनिवार की घटना में माओवादियों ने जोन्नागुड़ा गांव के पास जंगलों में सुरक्षा बलों को दो किलोमीटर के दायरे में उलझा दिया था और उनपर चारों तरफ से घात लगाकर धावा बोल दिया। जानकारी के मुताबिक वे पहाड़ों से भी फायरिंग कर रहे थे। जिस जगह पर यह हमला हुआ वो इलाका सिक्योरिटी फोर्स के तरेम बेस कैंप से मुश्किल से 15 किलोमीटर दूर है। नक्सली ने इस घटना के लिए कितनी तैयारी की थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एनकाउंटर के दौरान लाइट मशीन गन (एलएमजी) और रॉकेट लॉन्चर का भी इस्तेमाल किया, ऐसी भी सूचना सामने आ रही है।

महिला नक्सली भी हुई ढेर
शनिवार को माओवादी पीएलजीए बटालियन की कमान खुद नक्सल कमांडर माड़वी हिडमा है संभाल रहा था। उसके ग्रुप के करीब 250 नक्सलियों के साथ ही मदद के लिए आसपास के इलाकों के नक्सल कमिटियों के सदस्य भी बुला लिए गए थे। उनकी तैयारी कितनी बड़ी थी, यह इसी से पता चलता है कि हमले के थोड़े पहले ही 60 से 80 की तादाद में हथियारों से लैस माओवादी अपने नेता चंद्रन्ना की अगुवाई में बीजापुर में भी नजर आए थे। कहा जा रहा है कि पिछले मार्च में जब हिडमा बीजापुर में देखा गया था तो उसी समय सुरक्षा बलों को अलर्ट कर दिया गया था। इसी आधार पर सीआरपीएफ, कोबरा यूनिट, डीआरजी और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 2 अप्रैल को नकस्लियों के खिलाफ अभियान छेड़ा था। जानकारी के मुताबिक एनकाउंटर के दौरान दोनों ओर से कई घंटों तक फायरिंग हुई थी। अधिकारियों का दावा है कि इस एनकाउंटर में नक्सलियों को भी भारी नुकसान हुआ है और दावे के मुताबिक उन्हें दो ट्रैक्टरों पर डेड बॉडी ले जाते हुए देखा गया है। इनके अनुमान के मुताबिक इस घटना में 15 से ज्यादा माओवादी मारे गए हैं। मरने वालों में माओवादियों की महिला कैडर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है

झीरम घाटी हत्याकांड का भी सरगना माना जाता है हिडमा
शनिवार को हुआ हमला छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुई एक और बड़ी नक्सली वारदात के तुरंत बाद हुआ है। उस घटना में माओवादियों ने नारायणपुर जिले में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 27 जवानों को ले जा रही बस पर हमला कर दिया था, जिसमें 5 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और 14 जख्मी हुए थे। कादेनार से कन्हारगांव जा रही बस को नक्सलियों ने आईईडी धमाके से उड़ाने की कोशिश की थी। पिछले गुरुवार को ही सुरक्षा बलों ने बस को बारूदी सुरंग लगाकर उड़ाने की घटना में शामिल तीन माओवादियों को सुकमा जिले से गिरफ्तार किया था। हिडमा बहुत ही कुख्यात नक्सली है और कई बड़ी घटनाओं में उसका हाथ माना जाता है। वह मार्च, 2017 में सुकमा में हुए नक्सली हमले का भी संदिग्ध है, जिसमें सीआरपीएफ के 25 जवान मारे गए थे। तब भी नक्सलियों के साथ एनकाउंटर हो रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कई दिनों से सैकड़ों की तादाद में नक्सली बीजापुर, सुकमा, कांकेर के इलाकों में कैंप करते देखे गए हैं। हिडवा का हाथ 2013 में सुकमा की ही झीरम घाटी हत्याकांड में भी माना जाता है, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस की तमाम बड़ी लीडरशिप ही खत्म हो गई थी। उस घटना में 30 से ज्यादा लोग मारे गए थे। (अंतिम तस्वीर-फाइल (मार्च की घटना))












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