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भारत लौटेगा कोहिनूर ? बस्तर महाराजा जुटा रहे हैं दस्तावेज,जल्द करेंगे दावा

कोहिनूर को भारत वापस लाने की ख्वाहिश देश के हर नागरिक के दिन में छुपी हुई है। आपको जानकर ख़ुशी होगी कि छत्तीसगढ़ के बस्तर से कोहिनूर को वापस भारत लाने की कवायद शुरू हो चुकी है। बस्तर महाराज कमलचंद भंजदेव इस काम में जुटे हु

जगदलपुर,21 सितंबर। किसी समय भारत को अपनी चमक से रौशन कर चुका कोहिनूर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निधन के बाद से उनके ताज में जड़ा कोहिनूर हीरा भारत लौटने के लिए बेकरार है। कोहिनूर को भारत वापस लाने की ख्वाहिश देश के हर नागरिक के दिन में छुपी हुई है। आपको जानकर ख़ुशी होगी कि छत्तीसगढ़ के बस्तर से कोहिनूर को वापस भारत लाने की कवायद शुरू हो चुकी है। बस्तर महाराज कमलचंद भंजदेव इस काम में जुटे हुए हैं।

कोहनूर पर भारत का दावा , कीमत है 150 हजार करोड़

कोहनूर पर भारत का दावा , कीमत है 150 हजार करोड़

एक समय दुनिया का सबसे बड़ा हीरा था कोहिनूर,लेकिन समय के साथ अलग-अलग कारणों से उसका क्षरण होता रहा है। दुनियाभर में अपनी खूबसूरती के लिए आज भी अपनी पहचान को कायम रखने वाले नायाब "कोहिनूर" पर ब्रिटेन के राज परिवार का हक़ है,लेकिन किसी समय यह भारत की संपत्ति थी।ह 105.6 कैरेट का कोहिनूर हीरा दुनियाभर में सबसे खास रत्न का दर्जा रखता है। 21.6 ग्राम के इस हीरे की मौजूदा कीमत करीब 150 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है।

मां काली के आंख की शोभा बढ़ाता था कोहिनूर

मां काली के आंख की शोभा बढ़ाता था कोहिनूर

भले ही यह अंग्रेजो के कब्ज़े में हो,लेकिन किसी समय भारत पर इसका हक था। तेलंगाना प्रान्त के गोलकुंडा हीरा खदान से इसे निकाला गया था।कहते हैं कि काकतीय राजाओं ने इस कोहिनूर हीरे को अपनी कुलदेवी काली माता के मंदिर ले जाकर उनकी मूर्ति की बाईं आँख में जड़वा दिया। यह मंदिर दक्षिण भारत के वारंगल में स्थित माता भद्रकाली आकर्षक कोहिनूर हीरा का कोल्लूर खान यानि गोलकोंडा खदानों से खनन किया गया था।जिसपर बाद में मुगलों ने कब्ज़ा जमाया।

कोहिनूर को भारत लाना चाहते बस्तर के महाराजा, जुटा रहे दस्तावेज

कोहिनूर को भारत लाना चाहते बस्तर के महाराजा, जुटा रहे दस्तावेज

यह बेहद ही रोचक तथ्य है कि कोहिनूर हीरे का छत्तीसगढ़ के बस्तर से खास जुड़ाव रहा है। बस्तर के महाराजा कमलचंद भंजदेव ने दावा किया है कि 8 हज़ार किलोमीटर दूर लंदन में मौजूद कोहिनूर हीरे के असली मालिक बस्तर काकतीय राजपरिवार के पूर्वज रहे हैं।

भंजदेव ने का कहना है कि उन्हें इस संबंध में जानकारी छत्तीसगढ़ के दिवंगत नेता रामचंद्र सिंहदेव ने भी दी थी। बस्तर महाराजा ने कहा कि हम कोहिनूर से जुड़े दस्तावेज लगातार जुटा रहे हैं। काफी ऐतिहासिक दस्तावेज हमे मिल भी चुके हैं। वारंगल गजेटियर के अतिरिक्त दूसरे सूत्रों से भी कागज़ात एकत्र किए जा रहे हैं।जैसे ही हमारी खोज पूरी होगी भारत सरकार के मार्फत से कोहिनूर पर दावा प्रस्तुत किया जाएगा।

गोलकुंडा की खान से निकला था कोहिनूर

गोलकुंडा की खान से निकला था कोहिनूर

दरअसल कोहिनूर हीरा तेलंगाना के गोलकुंडा में खुदाई से निकला था। तेलंगाना के वारंगल राज्य चालुक्य काकतीय वंश का राज्य था। महराजा रुद्रदेव द्वितीय ने मुगल शासक खिलजी के गुलाम काफूर को लगान स्वरूप सौंप दिया था। हालाकिं यह स्पष्ट नहीं है कि कोहिनूर सौंपा गया या चोरी किया गया। बहरहाल इसके बाद उसपर मुस्लिम शासकों ने अपना कब्ज़ा जमा लिया था।

ब्रिटेन की महारानी के निधन के बाद गहराया मामला

ब्रिटेन की महारानी के निधन के बाद गहराया मामला

कोहिनूर उसके बाद कई शासकों के हाथ से गुजरते हुए आगे चलकर अंग्रेजों के साथ लग गया,जहां ब्रिटेन की महारानी के राजमुकुट में जड़ा गया। बस्तर के महाराजा कमलचंद भंजदेव का कहना है कि राजा प्रताप रूद्र देव अपने भाई अन्नमदेव और बहन रैलादेवी के वारंगल से बस्तर आ गए थे।

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आज भी काकतीय राजवंश का महल मौजूद है. आज भी यहां उनके वंशज रहते हैं। बस्तर राजपरिवार के मौजूदा वंशज कमलचंद्र भंजदेव ब्रिटेन की महारानी क़्वीन एलिजाबेथ के निधन के बाद अपने पूर्वजों के हवाले कोहीनूर को लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

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