शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, तीर्थ स्थल और पर्यटन स्थल अलग, सम्मेद शिखर आंदोलन का हो सम्मान

शंकराचार्य ने जोशीमठ त्रासदी पर कहा कि अगर तीर्थ को तीर्थ समझा गया होता,तो देवभूमि में ऐसे हालात न होते।

जोशीमठ त्रासदी से चिंतित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने धार्मिक स्थानों को पर्यटन स्थल बनाये जाने के फैसलों पर चिंता जताई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में दिए अपने एक बयान में कहा है कि सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनने के विरुद्ध जैन समाज के संघर्ष का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने जोशीमठ के हालातों पर भी चिंता जाहिर की।

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    शंकराचार्य ने जोशीमठ त्रासदी पर कहा कि अगर तीर्थ को तीर्थ समझा गया होता,तो देवभूमि में ऐसे हालात न होते। उन्होंने श्री सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर हो रहे विरोध पर कहा कि देश में जैन समाज अल्पसंख्यक होने के बावजूद श्री सम्मेद शिखर तीर्थ को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं,उसका सम्मान किया जाना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि हिन्दू समाज को यह बात समझनी चाहिए कि तीर्थ और पर्यटन अलग है। जोशीमठ सहित सम्पूर्ण देवभूमि को पर्यटन स्थल बनाने के कारण दुष्परिणाम स्वरूप लोगों के घरो में दरारे हैं। गौरतलब है कि जैन समाज द्वारा लगातार पारसनाथ और सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बना बनाने की मांग की जा रही है। जैन समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि तीर्थ स्थल को पर्यटक स्थल अधिसूचित का आदेश जल्द वापस लेकर पावन पवित्र स्थल घोषित कर दिया जाना चाहिए।
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