Rajnandgaon: तीन साल बाद निकलेंगी भव्य चलित विसर्जन झांकियां, भक्ति में झूमेंगे लोग, जानिए क्यों है खास
राजनांदगांव शहर गणेश विसर्जन की झांकियों के लिए देशभर में मशहूर है। कोरोना काल में तीन साल तक आयोजन में प्रतिबंध के बाद, अब फिर से इन भव्य और चलित झांकियों को देखने का मौका लोगों को मिलेगा।
राजनांदगांव, 07 सितम्बर। छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव शहर गणेश विसर्जन की झांकियों के लिए देशभर में मशहूर है। कोरोना काल में तीन साल तक आयोजन में प्रतिबंध के बाद, अब फिर से इन भव्य और चलित झांकियों को देखने का मौका लोगों को मिलेगा। इस साल इन झांकियों के शहर भ्रमण को लेकर प्रशासन ने निर्देश जारी कर दिया है। तो दूसरी ओर, इसे अंतिम रूप देने का काम समिति के सदस्य और कलाकार कर रहें हैं।

9 सितम्बर को सड़को पर निकलेंगी झांकियां
राजनांदगांव शहर में 9 सितंबर की रात विसर्जन झांकियां फिर सड़कों पर दिखेंगी। इस बार झांकियों को लेकर समितियों में अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है। समितियों ने अलग अलग थीम पर झांकियां तैयार कर ली है। हर बार की तरह 9 सितम्बर को डीजी लाइटिंग की चमक पूरे राजनांदगांव शहर को रौशनी से भर देगी। इस साल इन झांकियों को देखने के लिए पड़ोसी राज्यों से लगभग 2 लाख से अधिक लोगों के आने की संभावना जताई जा रही है।

स्थानीय कलाकारों को मिलता है रोजगार
राजनांदगांव मे हर साल इन झांकियों की संख्या बढ़ती जा रही है, दस साल पहले शहर में झांकियों से 20-22 होती थी। इस बार शहर में 55 झांकियों का निर्माण हो रहा है। खास बात यह है कि इसमें से ज्यादातर झांकियों का निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा किया जाता है। जिससे लगभग 2000 स्थानीय कलाकारों को रोजगार भी मिलता है। कोरोना के चलते तीन साल तक विसर्जन झांकियों पर रोक लगी रही। इससे कारीगरों और कलाकारों को भी काम नहीं मिल पाया था।

हाईटेक उपकरणों व डीजी लाइटों का होता है उपयोग
इन झांकियों के निर्माण में 3 से 5 लाख रुपये तक खर्च किये जाते हैं। इस तरह शहर में लगभग 3 करोड़ रुपये की झांकियों में खर्च किया जाता है। इसके साथ ही डीजे साउंड सिस्टम , व आधुनिक लाइटों का इस्तेमाल भी किया जाता है। झांकी के निर्माण से जुड़े कारीगरों ने बताया कि समय के साथ झांकियों भी हाईटेक हो गई है। पहले मिट्टी की प्रतिमाओं की जगह अब डाई से बनने वाली फाइबर की प्रतिमाओं का उपयोग होता है। इसके साथ म्युजिक सिस्टम, आधुनिक उपकरणों की वजह से झांकियों पर खर्च बढ़ गया है।

जिले में 80 साल पुरानी है झांकियों की परम्परा
स्थानीय लोगों को अनुसारराजनांदगांव में विसर्जन झांकी की परंपरा लगभग 80 साल पुरानी है। तब से लेकर अब तक हर साल गणेश विसर्जन झांकियों के साथ होती है। झांकी निकालने वाली कई समितियां शुरुआती दौर से अब तक परंपरा निभा रही है। वहीं नए युवाओं ने पुरानी समितियों की परंपरा को आगे बढाने का काम किया है। इसके लिए अलग से समिति गठित होती है। इस साल शहर में विसर्जन के दिन 9 सितंबर की रात 50 से अधिक झांकियां निकाली जाएगी। विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं द्वारा सर्वश्रेष्ठ झांकियों को प्रोत्साहन स्वरूप स्मृति चिन्ह व नगद पुरस्कार भी दिया जाता है। जगह-जगह पंडालों में इसके लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाते हैं।

जानिए क्यों खास होती है यह झांकियां
दरअसल इन झांकियों को अलग अलग थीम रुओ बनाया जाता है। और एक समिति दूसरे समिति से थीम की सीक्रेट शेयर नही करते हैं। दो माह पहले से ही झांकियों का निर्माण शुरू के दिया जाता है। जिसमें , भगवान राम, शंकर जी, हनुमान जी, गणेश जी, कृष्ण राधा समेत सभी देवी देवताओं की चलित झांकियां देखने को मिलती है। हर झांकी दो से तीन जीप वाहन में लाइटिंग व डेकोरेशन कर सजाई जाती है। जिसमें झांकी के विषय का विस्तार से जीवंत चित्रण कर उसे आकर्षक बनाया जाता है। राजनांदगांव के बाद ये झांकियां रायपुर और नागपुर तक में नजर आती है। झांकियों को लेकर लोगों में उत्साह रहता है।

प्रशासन ने जारी किया है निर्देश, इस बार टोकन सिस्टम
मंगलवार को पुलिस प्रशासन व एसडीएम ने सभी गणेश समितियों की बैठक लेकर निर्देशित किया है की झांकी निकालने से पहले सभी झांकियों को रुट की जानकारी देकर आवेदन करना करना होगा, रूट की जानकारी देने वाली समितियों को ही इस झांकी में शामिल किया जाएगा। इसके बाद पुलिस विभाग द्वारा रूट सुविधा अनुसार तय किया जाएगा, जिसके बाद समितियों को टोकन जारी किया जाएगा, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था बाधित ना हो। इसके साथ ही वाहन चालक नशे में न हो इस बात का ध्यान रखेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के नियमो का करना होगा पालन
पुलिस प्रशासन साउंड सिस्टम के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। समितियां कान फोड़ू सिस्टम नही लगाएंगे। सभी समितियों को साउंड सिस्टम के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करना होगा इसके साथ ही अन्य राज्य से मंगाए गए साउंड सिस्टम की जानकारी भी पुलिस विभाग को देनी होगी। स्वागत के लिए रास्ते में टेंट लगाने पर भी पुलिस ने प्रतिबंध लगा दिया है।












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