Palakkad Mob Lynching: पलक्कड़ में कथित मॉब लिंचिंग, परिवार की मुआवजे-SC/ST एक्ट के तहत जांच की मांग
Palakkad Mob Lynching: केरल के पलक्कड़ जिले में छत्तीसगढ़ के एक 31 वर्षीय युवक रामनारायण की कथित मॉब लिंचिंग ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। परिवार और कांग्रेस ने 25 लाख रुपये मुआवजे, SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जांच और मॉब लिंचिंग के आरोप लगाने की मांग की है।
परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया है। आइए, पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।

घटना क्या है?
- तारीख और जगह: 18 दिसंबर 2025 (बुधवार) शाम को पलक्कड़ के किझाकेअट्टप्पल्लम (वालायार के पास)।
- आरोप: चोरी के शक में एक भीड़ ने रामनारायण को पीट-पीटकर मार डाला।
- विवरण: शाम 7:40 बजे के आसपास चोरी के शक में रामनारायण को भीड़ ने घेरा और बेरहमी से पीटा। घायल होने पर उन्हें पलक्कड़ जिला सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
- पुलिस कार्रवाई: अब तक 5 लोग गिरफ्तार। पोस्टमॉर्टम पूरा हो चुका है, शव सरकारी मुर्दाघर में रखा गया है।
परिवार की मांगें
रामनारायण के भाई ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा-
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25 लाख रुपये मुआवजा: रामनारायण के दो छोटे बच्चे हैं। परिवार चाहता है कि केरल सरकार बच्चों को तुरंत यह राशि दे।
- SC/ST एक्ट के तहत केस: परिवार अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से है। इसलिए आरोपियों पर SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत कार्रवाई हो।
- मॉब लिंचिंग का आरोप: परिवार मांग कर रहा है कि घटना को मॉब लिंचिंग के रूप में दर्ज किया जाए।
- शव न लेने का ऐलान: 'जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम शव नहीं लेंगे।'
- वी डी सतीशन (केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता): मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को पत्र लिखा। कहा कि भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेना अस्वीकार्य है। 2018 में अट्टापडी में मधु (आदिवासी युवक) की मॉब लिंचिंग का हवाला दिया। मांग की कि परिवार को तुरंत वित्तीय सहायता दी जाए।
- के.सी. वेणुगोपाल (AICC महासचिव): X पर पोस्ट में घटना को 'बेहद चौंकाने वाली' बताया। केरल सरकार पर डर फैलाने वाले प्रोपेगेंडा और अफवाहों पर रोक न लगाने का आरोप लगाया। मांग की:
- तुरंत पर्याप्त मुआवजा।
- शव सम्मानजनक तरीके से परिवार को सौंपा जाए।
- सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई।
- कांग्रेस ने कहा कि केरल जैसे सांप्रदायिक सद्भाव वाले राज्य में ऐसी घटनाएं राज्य की छवि खराब कर रही हैं।
- परिवार को कोई सहायता नहीं: अब तक सरकार या पुलिस से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।
- SC/ST एक्ट: पीड़ित SC समुदाय से हैं, इसलिए कानूनी रूप से मजबूत कार्रवाई की मांग।
- मॉब लिंचिंग का पैटर्न: केरल में पहले भी ऐसी घटनाएं (जैसे 2018 मधु केस) हो चुकी हैं। कांग्रेस इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बता रही है।
- पुलिस ने 5 गिरफ्तारियां कीं, जांच जारी है।
- सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
- परिवार का दावा है कि पुलिस घटना के 4 घंटे बाद पहुंची, जिससे जान बचाई नहीं जा सकी।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
क्यों हो रही है मांग?
पुलिस और सरकार का पक्ष
यह घटना मॉब लिंचिंग, सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। परिवार और विपक्षी दल अब दबाव बढ़ा रहे हैं। जांच के नतीजे आने बाकी हैं।
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