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जानिए, कैसा था झीरम घाटी नक्सल हमले का मंजर, 25 मई 2013 की तारीख, जिसे कभी देश नहीं भुला पायेगा

रायपुर, 25 मई। आज से 9 साल पहले छत्तीसगढ़ में जो घटना घटी थी,उसे कोई नहीं भुला सकता,इस घटना में कांग्रेस पार्टी के नेताओ की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई थी। छत्तीसगढ़ में साल 2013 अंत में विधानसभा चुनाव होने थे, कांग्रेस बीते दो चुनावों में भाजपा से लगातार हार रही थी,लेकिन रमन सिंह की अगुवाई में 10 साल तक सत्ता चला चुकी भाजपा के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी का फैक्टर भी देखा जा रहा था।

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    कांग्रेस ने खो दिए थे अपने शीर्ष नेता

    कांग्रेस ने खो दिए थे अपने शीर्ष नेता

    साल 2013 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के पहले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी,लेकिन 25 मई 2013 को जैसे सब कुछ बदल ही गया,इस दिन चुनावी अभियान में निकले कांग्रेस नेताओ के काफिले पर नक्सली हमला हो जाने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ,पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेता शहीद हो गए। नतीजन चुनाव से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ही खत्म हो गई।

    चुनाव जीतने में पूरी ताक़त लगा दी थी कांग्रेस ने

    चुनाव जीतने में पूरी ताक़त लगा दी थी कांग्रेस ने

    छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 10 सालों तक सत्ता से दूर रहने के बाद 2013 के विधानसभा चुनाव जीतने के अपनी पूरी ताक़त लगा रही थी। अपने चुनावी अभियान के दौरान पार्टी पूरे प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ परिवर्तन यात्रा निकालने निकाल रही थी। 25 मई 2013 को भी इसी अभियान के तहत पार्टी के सभी बड़े नेता नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में में जुटे थे।

    सुकमा से जगदलपुर जा रही थी कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा

    सुकमा से जगदलपुर जा रही थी कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की अगुवाई में कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा में परिवर्तन यात्रा रैली समाप्त होने के बाद शाम करीब 4 बजे सुकमा से जगदलपुर जा रहा था ,इसी दरमियान जब झीरम घाटी से होकर गुजर रहा था,तभी नक्सलियों ने पेड़ों को गिराकर रास्ता रोक दिया,कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही करीब 200 नक्सलियों ने गाड़ियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग में कई लोगों की मौत हो गए,जबकि नक्सलियों ने नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल को बंधक बनाकर जंगलो के बीच ले जाकर मार डाला। झीरम घाटी नक्सल हमले में 30 से भी अधिक लोगों की मौत हुई थी। घटना में उस समय कांग्रेस के लगभग आधे शीर्ष नेता और सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए थे ।

    25 गाड़ियों में थे 200 कांग्रेस नेता सवार

    25 गाड़ियों में थे 200 कांग्रेस नेता सवार

    कांग्रेस की इस परिवर्तन यात्रा के काफिले में लगभग 25 गाड़ियों में 200 नेता सवार थे। काफिले में सबसे पहली गाड़ी तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की थी,जिसमे उनके साथ पुत्र दिनेश पटेल और आदिवासी नेता कवासी लखमा अपने सुरक्षा गार्ड्स के साथ थे। नंदकुमार पटेल के काफिले के ठीक पीछे पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू का वाहन था ।

    डेढ़ घंटे तक नक्सलियों ने की थी गाड़ियों पर फायरिंग

    डेढ़ घंटे तक नक्सलियों ने की थी गाड़ियों पर फायरिंग

    करीब डेढ़ घंटे तक माओवादियों ने झीरमघाटी को आंतक से सराबोर रखा। फायरिंग होती रही,नेता मरते रहे। शाम को लगभग 5 बजे पहाड़ो के ऊपर पेड़ो के पीछे छुपे माओवदियों ने नीचे आकर गाड़ियों की तलाश शुरू की। डेढ़ घंटे तक चली गोलीबारी के दौरान मारे जा चुके लोगों को चाकू मारकर उनकी मृत हो जाने की पुष्टि की गई। बा भी जो लोग जिन्दा बचे थे,नक्सली उन्हें बंधक बना रहे थे।

    कर्मा को मारी 100 गोलियां,शव पर चढ़कर नाचे थे नक्सली

    कर्मा को मारी 100 गोलियां,शव पर चढ़कर नाचे थे नक्सली

    यह सब देखकर बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर रहे कांगेस नेता महेन्द्र कर्मा अपनी गाड़ियों से नीचे उतरे औरनक्सलियों से कहा कि मुझे बंधक बना लो, दूसरों को छोड़ दो ,जिसके बाद नक्सलियों ने तत्काल महेंद्र कर्मा को बंधक बनाकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। माओवादियों ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि उनका मुख्य टारगेट महेंद्र कर्मा ही थे,क्योंकि उन्होंने माओवादियों के खिलाफ सलवा जुडूम चलाया था। इसलिए नक्सली कर्म को अपना दुश्मन नंबर वन मानते थे। बताया जाटा है कि नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा के शरीर पर लगभग 100 गोलियां दागीं और 50 से अधिक बार चाकू से वार था। जब नक्सलियों को विश्वास हो गयकी महेंद्र कर्म नहीं रहे,तब उन्होंने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था।

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