खैरागढ जिले के ग्रामीणों ने राजनीतिक दलों का किया बहिष्कार, चुनावी झंडे बैनर, नेताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध
छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ जिले में 16 गांव के ग्रामीणों ने राजनीतिक दलों का बहिष्कार कर दिया है। इन गांवों में भाजपा कांग्रेस के नेताओं के प्रवेश और झंडे बैनर लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में चुनावी हलचल शुरू हो चुकी है। साल 2023 में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दांवपेच लगा रहें हैं। इस बीच खैरागढ़ जिले के 16 गांवों में ग्रामीणों ने महापंचायत के माध्यम से राजनीतिक दलों का बहिष्कार कर दिया है। इन गांव में चुनावी प्रचार प्रसार एवं झंडे बैनरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

फाइल जिला मुख्यालय में अटकी
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सीताडबरी के मात्र 3 किसानों को ही सड़क में प्रभावित जमीन का मुआवजा दिया गया है। बाकी किसानों में से 9 गांव के 150 किसानों के मुआवजे की फाइल जिला मुख्यालय में अटकी हुई है। ग्रामीणों की जमीन को सरकारी बताकर गुमराह किया गया, जिसे सर्वे के बाद प्रकरण बनाया गया इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ना तो उन्हें मुआवजे के मिल पा रहा है और ना ही पूरी तरह से जानकारी दी जा रही है।
एक माह में मुआवजा देने के निर्देश
खैरागढ कलेक्टर डॉ. जगदीश सोनकर ने खनिज निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन और पूर्व विधायक गिरवर जंघेल के माध्यम से किसानों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। जिसमें कलेक्टर को एक माह के भीतर समस्याओं का समाधान कर किसानों को मुआवजा वितरण करने के निर्देश दिए गए। किसानों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल सड़क संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष डॉ बलदेव जंघेल ने कहा कि किसानों के मामले को लेकर मुख्यमंत्री निवास तक जाने की तैयारी कर ली गई है।
नेताओं के गांवों में प्रवेश पर प्रतिबंध
इन गांवों में दीवारों पर पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं। जिसमें लिखा गया है। कि जब तक ग्रामीणों को सड़क में प्रभावित भूमि का मुआवजा नहीं मिलेगा। तब तक राजनीतिक दलों के नेताओं गांव में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा सीएम हाउस पहुंचने की तैयारी कर रहें है। इसके अलावा राजनीतिक दलों के झंडे बैनरों को भी निकाल दिया गया है।
जानिए क्या है मुआवजे का मामला
दरअसल खैरागढ जिले के छुईखदान-दनिया मार्ग निर्माण के दौरान ग्रामीणों की जमीन प्रभावित हुई थी। जिसमें 258 किसानों के निजी कृषि भूमि पर और 130 से ग्रामीणों के भूमि पर बने मकानों को तोड़कर सड़क बनाया गया है। सड़क निर्माण के दौरान प्रभावितों को मुआवजा देने की बात की गई थी। 9 गांवों के 148 किसानों की फाइल अब भी जिला मुख्यालय में अटकी है। 27 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण 74 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में लगभग 24 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो चुका है। जिसमें 16 गांव के 500 परिवार मुआवजे को लेकर परेशान हैं। इस मार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग के एडीबी प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण होने के बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया है। ग्रामीणों के विरोध के बाद सर्वे का काम शुरू किया गया था।
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