प्रदेश के उत्कृष्ट गौठानों में सीएम भूपेश के गृह जिले का केसरा गौठान भी पुरस्कृत, जानिए कैसे बना खास

छत्तीसगढ़ के 10 हजार 624 गौठानो में तीन उत्कृष्ट गौठान को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सम्मानित किया। उत्कृष्ठ गौठानों की सूची में दुर्ग जिले का ग्राम केसरा का आदर्श गौठान भी शामिल किया गया।

दुर्ग, 16 अगस्त। छत्तीसगढ़ के 10 हजार 624 गौठानो में तीन उत्कृष्ट गौठान को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सम्मानित किया। इन उत्कृष्ठ गौठानों की सूची में दुर्ग जिले का ग्राम केसरा का आदर्श गौठान भी शामिल किया गया। ग्राम केसरा की गौठान समिति के अध्यक्ष को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार की राशि प्रदान कर सम्मानित किया। क्योंकि ग्राम केसरा कृषि विभाग द्वारा तय किए गए मापदण्ड में खरा उतरा है। आइए जानते हैं कि यह गौठान आखिर क्यों खास है।

30 महिला स्व सहायता समूह कर रही है कार्य

30 महिला स्व सहायता समूह कर रही है कार्य

दरअसल दु्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र के ग्राम केसरा की जनसंख्या 4560 है। यहां कुल 1128 परिवार है। जिनमें से 30 महिला स्व सहायता समूह की 342 सदस्य विभिन्न आजीविकामूलक कार्यों में लगी है। जहां सरकार की ओर से इन्हें 10 एकड़ क्षेत्र में गौठान निर्माण कर दिया गया है। वहीं चारागाह एवं बाड़ी के लिए 30 एकड़ भूमि दी गई है। गांव के किसानों से गोबर खरीदी कर वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाता है। इसके लिए 42 टैंक बनाए गए हैं। सर्वसुविधा युक्त गौठान अब महिलाओ के आजीविका केंद्र का रूप ले चुका है।

बाड़ी योजना से बनी आत्मनिर्भर

बाड़ी योजना से बनी आत्मनिर्भर

ग्राम केसरा के सरपंच भागवत सिन्हा ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी योजना नरवा गरवा घुरवा बाड़ी के तहत गौठान का निर्माण किया गया है। इस गौठान से ग्राम पंचायत की 30 महिला समूहों की 342 महिला सदस्यों को सीधे लाभ मिल रहा है। इसके तहत यहां लगभग 23 एकड़ सरकारी भूमि को बाड़ी के रूप में तब्दील कर विभिन्न सब्जी जैसे गलका भिंडी करेला पालक लाल चेच भाजी का उत्पादन किया जा रहा है। यहां सब्जी व फल उत्पादन के अलावा गौठान के पशुओं के लिए लिए 7 एकड़ में नेपियर ग्रास खेती भी की जा रही है। ऑर्गेनिक खेती होने के कारण इन सब्जियों मांग बाजारों में बनी रहती है। इस बाड़ी से महिला समूह की 25 महिलाओं को अब तक 18 लाख 43 हजार की आमदनी हुई है। जिससे प्रतिमाह समूह की महिलाओं को 6000 रुपये की आय प्राप्त हुआ है।

महिलाओं ने तैयार किया उच्च गुणवत्ता का वर्मी कंपोस्ट

महिलाओं ने तैयार किया उच्च गुणवत्ता का वर्मी कंपोस्ट

ग्राम केसरा के सचिव राजकुमार सेन ने बताया कि शासन की योजना का लाभ उठाते हुए महिलाओं ने केसरा के गौठान में वर्मी कंपोस्ट एवं सुपर कंपोस्ट उत्पादन प्रारंभ किया। ग्राम केसरा में अब तक 3,91,699 किलोग्राम गोबर की खरीदी की गई है। जिसकी राशि 7,83,380 रुपए विक्रेता किसानों को दी जा चुकी है। ग्राम पंचायत की यात्रा में 18 महिला स्व-सहायता समूह कार्यरत है। इन समूहों ने 1,50,480 किलोग्राम खाद का निर्माण किया। जिससे 1,49,700 किलोग्राम खाद बेचकर समूह को 4 लाख 98 हजार 501 रुपये की आमदनी प्राप्त हुई । इसलिए ग्राम केसरा सर्वाधिक खाद विक्रय एवं लाभ अर्जित करने वाले पंचायतों में प्रथम स्थान पर रहा।

इसलिए खास है यह गौठान

इसलिए खास है यह गौठान

ग्राम केसरा के उत्कृष्ट गौठान में 1- 2 नहीं बल्कि 7 आजीविका के कार्य संचालित हो रहे हैं। इनको गौठानों में शासन की योजनाओं का लाभ उठाते हुए इंटीग्रेटेड मुर्गी, मछली पालन, तेल पेराई, से लेकर सामूहिक बाड़ी, मिनी राइस मिल, आटा चक्की, वर्मी कंपोस्ट उत्पादन जैसे आजीविका मूलक कार्य किए रहे हैं। इन कार्यों से ग्राम पंचायत केसरा की 300 से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। जिनसे उनके जीवन में आर्थिक क्रांति आई है। गांव के इस गौठान को आजिविका केंद्र के रूप में बदलने के लिए ही केसरा का चयन किया गया है। ग्राम केसरा उत्कृष्ठ गौठान के लिए प्रशस्ति पत्र, 50 हजार की राशि से पुरस्कृत किया गया।

इन मापदण्डों मे उतरा खरा

इन मापदण्डों मे उतरा खरा

दरअसल कृषि विभाग ने उत्कृष्ट गौठानों के चयन के लिए बुनियादी ढांचा, गोबर खरीदी एवं कंपोस्ट उत्पादन आजीविका एवं स्वालंबन को आधार मानते हुए कुल 100 अंक निर्धारित किए गए थे। बुनियाद ढाचा के अंतर्गत गौठानों में पानी, विद्युत कोटना निर्माण, सोलर पंप, फेंसिंग सहित जियो टैगिंग के लिए अधिकतम 7 अंक निर्धारित किया गया था। तो वहीं गौठानों में गोबर खरीदी एवं कंपोस्ट उत्पादन के अंतर्गत गोबर की सक्रिय खरीदी, सक्रिय गोबर विक्रेता, वर्मी टांकों की उपलब्धता, उत्पादन के विरुद्घ बिक्री आदि पर अधिकतम 71 अंक निर्धारित किए गए थे। वहीं आजीविकामुलक गतिविधियों एवं महिला समूह के प्रति सदस्य की औसत आय पर अधिकतम 12 अंक तथा स्वावलंबी गौठान द्वारा गोबर क्रय हेतु किए गए भुगतान किश्त संख्या के लिए अधिकतम 10 अंक निर्धारित किया गया था।

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