Bandar Movie Review: डेटिंग ऐप्स के खौफनाक खेल पर अनुराग कश्यप की बड़ी चोट, 'बंदर' में बॉबी देओल ने लूटी महफिल

Bandar Movie Review: डिजिटल दौर में रिश्तों की शुरुआत जितनी आसान हो गई है, उनके टूटने का असर उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। डेटिंग ऐप्स पर शुरू होने वाली कहानियां कब प्यार, जुनून, बदले और विनाश की राह पकड़ लें, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी नई फिल्म 'बंदर' में इसी जटिल और असहज सच्चाई को बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं।

न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली फिल्म है 'बंदर'
बॉबी देओल स्टारर मूवी बंदर आज यानी 5 जून 2025 (शुक्रवार) को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और लोगों को ये फिल्म पसंद आ रही है। फिल्म बंदर सिर्फ एक थ्रिलर नहीं बल्कि आधुनिक रिश्तों, सामाजिक धारणाओं और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली फिल्म है।

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क्या है फिल्म 'बंदर' की कहानी?

-फिल्म की कहानी समर मेहरा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कभी टेलीविजन की दुनिया का चमकता सितारा था लेकिन अब अपने करियर के ढलते दौर से जूझ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ काम के अवसर कम हो गए हैं और निजी जिंदगी भी संघर्षों से भरी हुई है। अपनी यंग गर्लफ्रेंड खुशी के सामने वह लगातार बेहतर भविष्य के सपने बुनता रहता है जबकि हकीकत में आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उसे अंदर ही अंदर तोड़ रही होती हैं।

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-कहानी अचानक तब करवट लेती है जब पुलिस समर को गिरफ्तार कर लेती है। उस पर उसकी एक्स गर्लफ्रेंड गायत्री द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं। समर खुद को निर्दोष बताता है लेकिन एक बार आरोप लगने के बाद उसकी दुनिया पूरी तरह बदल जाती है। इसके बाद फिल्म दर्शकों को कानून, जेल, मीडिया ट्रायल और सामाजिक पूर्वाग्रहों से भरी एक अंधेरी दुनिया में ले जाती है, जहां सच और झूठ के बीच की रेखा लगातार धुंधली होती जाती है।

रिश्तों के टूटने की कीमत और बदले की मानसिकता

-'बंदर' की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कहानी को सिर्फ अपराध और सजा तक सीमित नहीं रखती। फिल्म रिश्तों के भावनात्मक पहलुओं को भी गहराई से टटोलती है। गायत्री का किरदार उस मानसिक स्थिति को सामने लाता है, जहां अस्वीकृति, भावनात्मक चोट और इस्तेमाल किए जाने का एहसास किसी व्यक्ति को खतरनाक फैसले लेने के लिए प्रेरित कर सकता है।

-वहीं समर का किरदार भी पूरी तरह निर्दोष या आदर्श नहीं दिखाया गया है। फिल्म उसे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करती है, जो अपनी गलतियों और कमजोरियों का सामना करने को मजबूर होता है। यही वजह है कि कहानी महज कोर्टरूम ड्रामा न बनकर इंसानी रिश्तों और जिम्मेदारियों की पड़ताल बन जाती है।

क्यों खास है फिल्म का शीर्षक 'बंदर'?

-पहली नजर में फिल्म का नाम अजीब लग सकता है लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ इसका अर्थ गहराता जाता है। यहां 'बंदर' एक प्रतीक के रूप में सामने आता है। समर ऐसा इंसान बन जाता है जिसे कभी सिस्टम, कभी समाज और कभी निजी रिश्ते अपनी-अपनी दिशा में घसीटते रहते हैं। धीरे-धीरे उसकी पहचान, उसकी इच्छाएं और उसका आत्मविश्वास छिनता जाता है। यही रूपक फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाता है।

-अनुराग कश्यप हमेशा से कठिन और असहज विषयों को पर्दे पर उतारने के लिए जाने जाते रहे हैं और 'बंदर' भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। फिल्म का पहला भाग बेहद प्रभावशाली है और दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। हालांकि दूसरे हिस्से में कहानी कुछ जगहों पर धीमी महसूस होती है और कुछ घटनाएं दोहराव का आभास कराती हैं।

-इसके बावजूद फिल्म का माहौल, डायलॉग और किरदारों की जटिलता दर्शकों की रुचि बनाए रखते हैं। जेल व्यवस्था, भ्रष्टाचार और न्याय प्रणाली पर आधारित कई फिल्में पहले भी बन चुकी हैं लेकिन अनुराग कश्यप अपने अलग अंदाज और असामान्य किरदारों के जरिए इसे नया रूप देने की कोशिश करते हैं।

कैमरा, म्यूजिक और तकनीकी पक्ष

-फिल्म का सिनेमैटोग्राफी पक्ष इसकी बड़ी ताकतों में शामिल है। कैमरा वर्क लगातार एक बेचैनी और घुटन का माहौल रचता है, जिससे दर्शक खुद को कहानी के भीतर महसूस करने लगते हैं। बैकग्राउंड स्कोर तनाव और रहस्य को बनाए रखने में सफल रहता है जबकि फिल्म के गीत कहानी के भावनात्मक पक्ष को और मजबूत बनाते हैं।

-क्लाइमैक्स में आने वाला ट्विस्ट दर्शकों को चौंकाता है और फिल्म को एक यादगार अंत देने की कोशिश करता है। हालांकि थोड़ी और चुस्त एडिटिंग फिल्म को और ज्यादा प्रभावशाली बना सकती थी।

फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी शानदार एक्टिंग

-पिछले कुछ सालों में बॉबी देओल ने खुद को एक नए एक्टर के रूप में स्थापित किया है और 'बंदर' इस बदलाव को और मजबूत करती है। समर मेहरा के किरदार में उन्होंने एक टूटे हुए, डरे हुए और भीतर से संघर्ष कर रहे व्यक्ति की मन की स्थिति को बेहद प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारा है। उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। भावनात्मक सीन्स से लेकर मानसिक दबाव को दर्शाने वाले सीक्वेंस तक, बॉबी देओल हर फ्रेम में प्रभाव छोड़ते हैं।

-फिल्म में सपना पब्बी का किरदार कहानी की धुरी है और उन्होंने अपने रोल को मजबूती से निभाया है। सबा आजाद ने भी अपने हिस्से के भावनात्मक दृश्यों को प्रभावशाली बनाया है। वहीं सान्या मल्होत्रा सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद याद रह जाने वाला प्रदर्शन देती हैं। सपोर्टिंग एक्टर्स की पूरी टीम फिल्म को वास्तविकता के करीब ले जाने में सफल रहती है और कहानी को विश्वसनीय बनाती है।

क्यों देखें अनुराग कश्यप की ये फिल्म?

-'बंदर' कोई आसान या हल्की-फुल्की मनोरंजन वाली फिल्म नहीं है। ये दर्शकों को असहज करती है, सोचने पर मजबूर करती है और कई बार भीतर तक झकझोर कर रखे देती है। यदि आप डार्क थ्रिलर, जटिल किरदारों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं तो ये फिल्म आपके लिए एक दिलचस्प अनुभव साबित हो सकती है।

-अनुराग कश्यप की अलग सोच, बॉबी देओल का शानदार अभिनय और रिश्तों व सिस्टम पर उठाए गए गंभीर सवाल 'बंदर' को एक ऐसी फिल्म बनाते हैं, जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी लंबे समय तक आपके दिमाग में बनी रहती है।

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