हिमाचल प्रदेश हैं सबसे कम बेरोजगार, छत्तीसगढ़ है देश में दूसरे नंबर पर !
Himachal Pradesh is the least unemployed, Chhattisgarh is second in the country
रायपुर, 2 मई। सबसे कम बेरोजगारी दर के मामले में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है। बीते दिनों सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की ओर जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2022 में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 0.6 फीसदी दर्ज किया गया है, जो स प्रदेश के इतिहास में अब तक के अपने न्यूनतम स्तर पर है। जबकि राष्ट्रीय बेरोजगारी दर का आंकड़ा मार्च के मुक़ाबले 0.9 प्रतिशत बढ़कर 7.8 फीसदी पर जा पहुँचा है। राष्ट्रीय आंकड़ों को देखें , तो अप्रैल में शहरी क्षेत्रों में 9.2 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों का आंकड़ा 7.2 प्रतिशत है। इधर सीएम भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य के लिए बनाई गई नीतियों के कारण से छत्तीसगढ़ ने यह उपलब्धि हासिल की है। यहां प्रदेश में नवाचार हुए, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए और हर हाथ को काम मिला।

सीएमआईई की तरफ से 1 मई 2022 को बेरोजगारी दर के आंकड़े जारी किए गए। इन आंकड़ों के मुताबिक सबसे कम बेरोजगारी दर वाले प्रदेशों में जहां 0.2 फीसदी के साथ हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर है। वहीं 0.6 फीसदी के साथ छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है। असम 1.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं ओडिशा में 1.5 प्रतिशत, तो गुजरात और मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 1.6 फीसदी है। दूसरी ओर सबसे अधिक बेरोजगारी दर के मामले में हरियाणा शीर्ष पर है, जहां 34.5 प्रतिशत बेरोजगारी दर दर्ज की गई है। बिहार में 21.1 फीसदी, जम्मू और काश्मीर में 15.6 फीसदी और गोवा में 15.5 प्रतिशत बेरोजगारी दर बताई गई है।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश ने समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ काम करना शुरू किया। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के साथ गांवों की आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में नवाचार किए गए। इसमें सुराजी गांव योजना के तहत नरवा-गरूवा-घुरवा-बाड़ी कार्यक्रम ने महती भूमिका निभाई, तो दूसरी तरफ गोधन न्याय योजना के साथ गौठानों को रुरल इंडस्ट्रियल पार्क के तौर पर विकसित किया गया, जिससे गोबर विक्रय से लेकर गोबर के उत्पाद बनाकर ग्रामीणों को रोजगार मिला। रोजगार के नए मौके सृजित हुए। 7 से बढ़ाकर 65 प्रकार के लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और इन लघु वनोपजों के एडिशन और मूल्य संवर्धन किया गया। इससे दूरस्थ अंचलों में भी लोगों को रोजगार मिला। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में कोशिश हुई, तो वहीं इस योजना के बाद उत्साहित किसानों की दिलचस्पी कृषि की ओर बढ़ी। छत्तीसगढ़ में खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ा। राजीव गांधी ग्रामीण कृषि भूमिहीन मजदूर योजना के माध्यम से पौनी --पसारी व्यवस्था से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता मिली। प्रदेश में नई उद्योग नीति लागू की गई, जिसमें कई वर्गों और विभिन्न क्षेत्रों में सब्सिडी के प्रावधान किए गए।
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गौरतलब है कि कोरोनाकाल में पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से प्रभावित हुई,इसी दौरान देश में भी अर्थव्यवस्था ढह गई, लेकिन कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दरमियान भी छत्तीसगढ़ आर्थिक मंदी से अछूता रहा। छत्तीसगढ़ में कोरोना के दौरान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के जरिए काम जारी रहा, जिससे लोगों को नियमित तौर पर काम मिलता रहा। महामारी अधिनियम के तहत तय मापदंडों के साथ औद्योगिक इकाई में भी काम चलता रहा। सभी सावधानियों के साथ आवश्यकता के मुताबिक बाजार भी खुले। सीएम भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ में रोजगार मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत आगामी पांच साल में राज्य में 12 से 15 लाख नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार मिशन राज्य के युवाओं के लिए नए मौके के तौर पर है।\












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