हसदेव अरण्य की जंग हुई दिलचस्प, क्या केंद्र सरकार रद्द करेगी Coal Block ?
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में चल रहे बहुचर्चित हसदेव बचाओ आंदोलन को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने पाला केंद्र सरकार को सौंप दिया है।
रायपुर, 27 जुलाई। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में चल रहे बहुचर्चित हसदेव बचाओ आंदोलन को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने पाला केंद्र सरकार को सौंप दिया है। हसदेव मामले में अब तक की सबसे अहम् जानकारी यह है कि मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव के जंगलों का बचाने का संकल्प सर्व सम्मति से पारित किया गया है। इस प्रकार राजस्थान सरकार को आवंटित कोल खदान को निरस्त करने पर फैसला केंद्र सरकार को लेना होगा।

हसदेव बचाने सदन हुआ एकमत
हसदेव अरण्य मामले में आदिवासियों के निशाने पर चल रही भूपेश बघेल सरकार को अपने बचाव में मजबूत तर्क मिल गया है। मंगलवार को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक धर्मजीत सिंह की ओर से हसदेव के जंगलों का बचाने का अशासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पारित हो गया। इस संकल्प के माध्यम से केंद्र सरकार से हसदेव अरण्य क्षेत्र में आवंटित सभी कोल ब्लॉक को रद्द करने की मांग की गई है। सीएम भूपेश बघेल ने सदन में कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए सरकार ने संकल्प का समर्थन किया है।

जोगी कांग्रेस विधायक धरमजीत सिंह ने पेश किया था संकल्प
विधायक धर्मजीत सिंह ने सदन में कहा कि छत्तीसगढ़ में 57000 मिलियन टन कोयले का भंडार है। इसमें से मात्र 158 मिलियन टन का उत्पादन ही हर साल हो रहा है। इसमें वृद्धि कर दी जाये, तब भी आगामी 50 सालों तक मात्र 25 हजार मिलियन टन कोयला ही निकाला जा सकेगा । इसमें 13000 मिलियन टन कोयले का भंडार हसदेव और मांड नदी के कैचमेंट क्षेत्र के निकट स्थित है। हसदेव के घने जंगल में 5 मिलियन टन कोयला भंडार, मिनी माता बांगो डैम के कैचमेंट क्षेत्र में आता है।
जिसके माध्यम से 6 लाख एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई होती है। मौजूदा समय में हसदेव इलाके में 5 ऐसे कोल ब्लॉक हैं, जहां खनन नहीं हो रहा है। जिसमे से परसा और केते एक्सटेंसन इकाई राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित हैं। हम केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि हसदेव क्षेत्र की सभी कोयला खदानों को निरस्त किया जाना चाहिए,जहां खनन शुरू नहीं हो पाया है।

अशोक गहलोत आये थे रायपुर,तब मिली थी पर्यावरण विभाग से NOC
गौरतलब है कि हसदेव अरण्य में कोयला इकाई का एक्सटेंशन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने राजस्थान की विद्युत कंपनी को कोयला खनन इकाई का आवंटन किया गया है। कोल ब्लॉक की NOC लंबे समय तक रुकी थी। इसी साल मार्च में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छत्तीसगढ़ पहुंचकर सीएम भूपेश बघेल से कोल ब्लॉक में खनन चालू करने के लिए सहयोग मांगा था।
इस मुलाकात के बात राज्य के वन विभाग ने खनन के लिए एनओसी जारी कर दी थी। इस मंजूरी के बाद देशभर में कोल ब्लॉक का विरोध शुरू गया था। जबकि सरगुजा में हसदेव अरण्य के क्षेत्र के आदिवासी लगातार खनन के लिए जंगल की कटाई के विरोध में कई महीनो से प्रदर्शन कर रहे हैं।

सरकार बोली,अब सब प्रधानमंत्री के हाथ में
विधानसभा में हसदेव के जंगल बचाने के लिए बनी सहमति के बाद सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट करके कहा कि विधानसभा में एक शासकीय संकल्प पारित करके केंद्र सरकार से वनों से जुड़ी एक अधिसूचना को वापस लेने की अनुशंसा की गई है।केंद्र की इस अधिसूचना में वन क्षेत्रों में गैर वन गतिविधियों की अनुमति की प्रक्रिया में ग्राम सभा को दरकिनार कर दिया गया है।इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी व अन्य लोग बुरी तरह प्रभावित होंगे।आशा है केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की आवाज़ सुनेगी।

सिंहदेव ने दी सदन को बधाई
वही अंबिकापुर विधायक और कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव ने ट्ववीट किया कि विधानसभा में हसदेवअरण्य क्षेत्र में पर्यावरण रक्षा के लिए अशासकीय संकल्प लाने पर धरमजीत सिंह जी को बधाई इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और अन्य दल के प्रमुख साथियों-विधायकों को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने के लिए बधाई व धन्यवाद।अब यह माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि छत्तीसगढ़वासियों की मंशा के अनुरूप विधानसभा में पारित सर्वसम्मत अशासकीय संकल्प के अनुसार हसदेव अरण्य क्षेत्र के नई कोल माइनिंग लीज़ को निरस्त करें।
यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़ में कोरोना की वापसी, रायपुर में मिले 224 मरीज, प्रदेश में 664, मंकीपॉक्स संदिग्ध भी शामिल












Click it and Unblock the Notifications