CM भूपेश बघेल के आरोपों, ED को लिखे पत्रों पर पूर्व सीएम रमन सिंह ने दिया जवाब, कांग्रेस बोली घबरा क्यों रहे
पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नान घोटाले और चिटफंड घोटाले की जांच को लेकर लगाए गए आरोपों और ED को लिखी चिट्ठी पर के हवाले पलटवार किया है। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने बुधवार को पत्रकारों को एक दस्ता
Nan Ghotala छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला यानि नान घोटाले का जिन्न फिर बाहर आ गया है। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नान घोटाले और चिटफंड घोटाले की जांच को लेकर लगाए गए आरोपों और ED को लिखी चिट्ठी पर के हवाले पलटवार किया है। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने बुधवार को पत्रकारों को एक दस्तावेज दिखाते हुए कहा है, चिटफंड प्रकरण की जांच में पुलिस उनके बेटे अभिषेक सिंह समेत सभी स्टार प्रचारकों को क्लीनचिट दिया है।

पूर्व सीएम रमन ने पूछे सवाल
पूर्व सीएम रमन सिंह ने कहा कि चार साल से इनकी ही पुलिस अब तक किसी प्रकरण में कोई आरोप आज तक सिद्ध नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल महज आरोप लगाते रहे हैं। कथित चिटफंड मामले में डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मेरे बेटे अभिषेक सिंह के खिलाफ जांच में विवेचना अधिकारी राजेश्वर सिंह ठाकुर और महेंद्र सिंह ने अपनी रिपोर्ट में किसी अपराध होना नहीं पाया है। चिटफंड के माध्यम से आर्थिक लाभ पाने करने में भी स्टार प्रचारकों की मिलीभगत नहीं मिली है।
पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा, सीएम भूपेश बघेल को ईडी की जांच पर अगर छत्तीसगढ़ पुलिस की जांच पर पूरा भरोसा है.वह मूल आधार ही जांच में धराशयी हो चुका है,जिसके हवाले वह ईडी को पत्र लिख रहे हैं।पूर्व सीएम ने कहा कहा, कि आपूर्ति निगम घोटाले पर भूपेश सरकार सरकार ने 2019 में एसआईटी बनाई थी। मुख्यमंत्री बघेल को बताना चाहिए कि उनकी जांच क्या हुआ। पूर्व सीएम ने अपनी आय से अधिक संपत्ति मांमले में भी जवाब दिया और कहा कि 2003 से 2018 तक चुनाव के दौरान दिए गए उनके सभी चुनाव शपथपत्रों की जांच हो चुकी है। और आयकर विभाग ने पाया है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।

कांग्रेस ने दिया जवाब
इधर छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा नान घोटाले और चिटफंड घोटाले की जांच के लिये ईडी को पत्र लिखने पर रमन सिंह इतने घबराये हुये क्यों हैं? रमन सिंह की तिलमिलाहट और बयानबाजी बता रही है कि रमन सिंह को नान घोटाले और चिटफंड घोटाले की ईडी से जांच की बात नागवार गुजर रही है। रमन सिंह को जांच की बात से किस बात का डर सता रहा है? नान गरीबों के राशन में 36,000 करोड़ का डाका डाला गया है, जब इतनी बड़ी रकम का लेनदेन हुआ है, नान डायरी में सीएम सर, सीएम मैडम, ऐश्वर्या रेसीडेंसी वाली मैडम जैसे दर्जनों नामों का उल्लेख है जिनका मोटी-मोटी रकम देने का भी उल्लेख है। ऐसे में इस अवैध लेनदेन की जांच यदि ईडी करती है तो इसमें रमन सिंह को क्या पीड़ा है?
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि रमन सिंह बतायें कि उन्हें नान घोटाले और चिटफंड घोटाले की ईडी की जांच से आपत्ति क्यों है? ईडी पर तो रमन सिंह की भाजपा को अटूट भरोसा है फिर उससे जांच की मांग में उनको तकलीफ किस बात की हो रही है? राज्य सरकार एसआईटी बना कर जांच करवाती है तो उसमें भी रमन सिंह को आपत्ति होती है। उनके पूर्व नेता प्रतिपक्ष अदालत जाकर जांच रोकने के लिये पीआईएल लगाते है जब ईडी से जांच की बात होती है तो उनको तकलीफ हो रही है। जब कुछ किया नहीं तो डर क्यों रहे है?

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा है ईडी को पत्र
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के बहुचर्चित नान घोटाला यानि नागरिक आपूर्ति और चिटफंड घोटाले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री बघेल इस पत्र पर जानकारी अपने सोशल मीडिया खातों पर भी साझा की है। कल ही ट्विटर पर उन्होंने लिखा था कि मैंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ में वर्ष 2004 से 2015 के बीच हुए "नान घोटाला" की जांच ईडी द्वारा किए जाने की मांग की है। यदि 15 दिनों में ईडी द्वारा जांच में कोई कार्यवाही नहीं की गयी तो न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
वही रायपुर में कांग्रेस की एक बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए सीएम बघेल ने कहा कि मैंने ईडी दो पत्र लिखे हैं । पहला पत्र में नान घोटाले के संबंध में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि चाहे कोई भी राजनीतिक दल का व्यक्ति हो ,उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त सीएम भूपेश बघेल ने दूसरा पत्र चिटफंड के प्रकरण में जांच के लिए पत्र लिखा है। सीएम भूपेश बघेल ने चिटफंड में साढ़े 6 हजार रुपए के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि चिटफंड में रोजगार मेला आयोजित करके बहुत सारे निवेशक को एजेंड के रूप में नियुक्ति पत्र सत्ता से जुड़े और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के द्वारा वितरण किया गया था। इसपर जांच होनी चाहिए।
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