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695 Movie: लफ्फाजी नहीं राम जन्मभूमि की तपगाथा है फिल्म '695', तीन नंबर्स में छिपा है गहरा राज, Exclusive

695 Movie: 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है, इस पल का इंतजार पूरा भारत बेसब्री से कर रहा है। पूरा हिंदुस्तान रामभक्ति में डूबा हुआ है और इसी राममय माहौल के बीच आज पर्दे पर रिलीज हो रही है फिल्म '695', जिसमें राम मंदिर के 500 सालों के संघर्ष को दिखाया गया है।

695 Movie

इस राम मंदिर के लिए तमाम कार सेवकों ने बलिदान दिया है उनसे संघर्ष की दास्तां आपको इस फिल्म में दिखाई देगी।इस फिल्म के को-प्रोड्यूसर अमित चिमनानी, जो कि छत्तीसगढ़ भाजपा के मीडिया प्रभारी भी हैं, ने वनइंडिया से टेलिफोन पर Exclusive बातचीत करते हुए इस फिल्म के तमाम पहलुओं पर खुलकर चर्चा की।

'कारसेवकों और रामक्तों का संघर्ष है...'

उन्होंने बताया कि 'ये केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि ये कारसेवकों और राम भक्तों का संघर्ष है, जिसे जानने का हक हर भारतीय को है, ये एक इमोशंस है, हमारी आने वाली जनरेशन को इसे जानना बहुत जरूरी है।'

उन्होंने इस फिल्म का नाम '695' क्यों रखा गया? का भी राज खोला, उन्होंने कहा कि 'ये तीनों अंक राम मंदिर के निर्माण में अहम रोल निभाते हैं।' उन्होंने कहा कि '6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा तोड़ गया और इसके बाद 9 नवंबर 2019 को राम जन्मभूमि के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था और 5 अगस्त को 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर का शिलान्यास किया था इसलिए इस फिल्म का नाम 695 रखा गया है।'

फिल्म में अरुण गोविल क्यों?

इस फिल्म में मशहूर एक्टर अरुण गोविल अहम रोल में हैं। जब अमित चिमनानी से पूछा गया कि इस फिल्म में अरुण गोविल को लेने के पीछे क्या कारण उनका राम वाली छवि है?

'राम का नाम लेते ही दिमाग में अरुण गोविल आते हैं'

तो इस पर उन्होंने कहा कि 'बिल्कुल, प्रभु श्री राम का नाम लेने पर अगर किसी भी एक्टर का चेहरा दिमाग में आता है तो वो वन एंड ओनली अरुण गोविल ही हैं, हालांकि फिल्म में वो भगवान राम के रोल में नहीं हैं बल्कि उन्होंने फिल्म में एक साधु का रोल किया है, जिनका पूरा जीवन राम मंदिर के बनने का इंतजार में व्यतीत हो जाता है।'

राम मंदिर पर 1050 पेज के निर्णय के आधार पर बनी है फिल्म

अमित चिमनानी ने कहा कि 'ये फिल्म 800 सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म के निर्माता श्याम चावला हैं, जो कि पेशे से तो बिजनेसमैन हैं लेकिन साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता भी हैं। फिल्म में कहीं भी आपको कोई लफ्फाजी नहीं देखने को मिलेगी, बल्कि ये फिल्म सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर पर 1050 पेज के निर्णय के आधार पर बनी है।'

500 सौ सालों के इतिहास की पूरी कहानी

'फिल्म में आपको बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा ढहाए जाने से लेकर राम मंदिर निर्माण, हिंदुओं का संघर्ष और उससे जुड़े करीब 500 सौ सालों के इतिहास की पूरी कहानी देखने को मिलेगी।'

फिल्म में अरुण गोविल के अलावा अशोक समर्थ, मनोज जोशी, मुकेश तिवारी, गोविंद नामदेव, अखिलेंद्र मिश्रा , गजेंद्र चौहान भी मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म के निर्देशक योगेश भारद्वाज और रजनीश बेरी हैं। तो वहीं फिल्म की पटकथा आदेश के. अर्जुन, योगेश भारद्वाज औऱ श्याम चावला ने लिखी है।

'राम एक भरोसे का नाम है और वो सबके हैं'

रामलला की प्राण -प्रतिष्ठा को कांग्रेस ने बीजेपी का इवेंट बता दिया है इस पर भाजपा नेता अमित चिमनानी ने कहा कि 'राजनीति हम नहीं वो लोग कर रहे हैं, राम एक भरोसे का नाम है और वो सबके हैं, बड़े इंतजार के बाद ये दिन आया है और इसके लिए हर किसी को खुश होना चाहिए लेकिन कुछ लोगों के ये समझ में नहीं आता है।'

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