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हाथी के बच्चे का Rescue Operation, जान बचाने वालों की जान पर बन आई,जानिए वजह

कोरबा,16 सितंबर। छत्तीसगढ़ के कई संभागो में अब रिहायशी इलाकों में भी हाथियों की धमक देखी जा रही है। कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र के जंगलो में हाथियों की मौजूदगी लगातार बनी रहती है,इसलिए वन विभाग को लगातार हाथियों के दल पर निगरानी करनी पड़ती है। इसी दरमियान एक गड्ढे में गिरे हाथी के छोटे बच्चे की जान बचाने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। क्योंकि हाथी का बच्चा अकेले नहीं था,उसके साथ 21 हाथियों का दल था,ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों के लिए जोखिम बहुत अधिक था. चिंता इस बात की थी कि नन्हे गजराज की जान बचाने के चक्कर में खुद अपनी जान ना गंवा बैठें।

हाथी का बच्चा नाले में गिरा ,वहीं रुक ये 21 हाथी

हाथी का बच्चा नाले में गिरा ,वहीं रुक ये 21 हाथी

मिली जानकारी के मुताबिक कोरबा जिले के कटघोरा- अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग में सड़क पार करने के दौरान हाथियों के दल पर मुसीबत आन पड़ी,जब दल में शामिल एक नन्हा हाथी एक नाले में गिर गया। बच्चे के नाले के गड्ढे में गिरने के बाद हाथियों का दल उसी जगह ठहर गया। हथिनी अपने बच्चे को गड्डे से निकालने के लिए घंटो कोशिश करती रही,लेकिन असफल रही।

जान जोखिम में डालकर बचाया नन्हे गजराज को

जान जोखिम में डालकर बचाया नन्हे गजराज को

हथिनी बच्चे की जान बचाने के लिए लगातार दो घंटे तक कोशिश करती रही,लेकिन नहीं निकाल सकी। हाथियों का दल भी उसी जगह रुका रहा,जिसकी सुचना वन विभाग को मिलीं। क्योंकि नन्हा हाथी कांक्रीट के बने नाले में फंसा हुआ था,इसलिए उसको बाहर निकालना मुश्किल था। लेकिन मौके पर पहुंचे वन विभाग के जांबाज़ कर्मचारियों ने जेसीबी का इस्तेमाल करके हाथी के बच्चे को नाले से सकुशल बाहर निकाल दिया। जिसके बाद हाथी अपने दल में जा मिला ।

4 घंटे बंद रहा आवागमन

4 घंटे बंद रहा आवागमन

कोरबा के कटघोरा वन मंडल में कुछ दिनों से 21 हाथी का एक दल घूम रहा है। गुरुवार की शाम यह दल कटघोरा से लगभग 35 किलोमीटर दूर ग्राम मड़ई के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग 130 को पार कर रहा था। तभी दल में शामिल महज एक साल छोटा सा हाथी सड़क किनारे एक नाला में गिर गया। वन विभाग को जल्द जल्द से जल्द बच्चे को गड्डे से बाहर निकालना था,क्योंकि सड़क के किनारे ही बने नाले में गिरने के कारण स्थिति बिगड़ गई थी। हाथियों का झुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही ठहर गया,जिसके कारण शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक रास्ता बंद रहा। जब हाथी का बचाव किया गया,तब जाकर हाथियों का दल आगे बढ़ा।

JCB के सामने आ जाती थी हथिनी , था जान का खतरा

JCB के सामने आ जाती थी हथिनी , था जान का खतरा

केंदई के फारेस्ट अधिकारी अभिषेक दुबे ने बताया कि हाथी के बच्चे को नाले से बाहर निकालने निकालने के लिए बुलवाई गई, तो उसकी मां जेसीबी के सामने आकर खड़ी जाती थी। जिसके कारण बच्चे को निकालने में काफी देरी हुई। क्रेन ऑपरेटर और वन कर्मियों की जान का भी खतरा था,इसलिए काफी सतर्कता के साथ जोखिम लेकर बचाव अभियान चलाया गया। इस दौरान हथिनी थोड़ी देर के लिए नाले के पास से हटी ,तो मौका मिलते ही टीम ने रेस्क्यू करके बच्चे को बाहर निकाल लिया। इसके बाद हाथियों का दल वापस जंगल की तरफ रवाना हुआ।

 उत्तराखंड में घटी दिलचस्प घटना, पूर्व सीएम का हुआ हाथियों से सामना

उत्तराखंड में घटी दिलचस्प घटना, पूर्व सीएम का हुआ हाथियों से सामना

हाथियों का जमावड़ा छत्तीसगढ़ ही नहीं ,कई अन्य राज्यों में है। बुधवार को ही उत्तराखंड में एक घटना घटी थी,जहां राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दुगड्डा के बीच पौड़ी से कोटद्वार की ओर आ रहे थे. इसी दरमियान त्रिवेंद्र सिंह रावत के काफिले के साथ लोगों को हाथी ने रोक दिया। हाथी के करीब आने पर पूर्व सीएम समेत सभी लोगों को अपनी गाड़ियां छोड़कर पहाड़ पर चढ़ना पड़ गया था। इस घटना में लगभग आधा घंटे की मशक्कत के बाद वन कर्मियों ने हवाई फायर करके हाथियों को रास्ते से खदेड़ा था।

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