सीएम भूपेश बघेल ने लोकवाणी में किया दावा, छत्तीसगढ़ में की जा सकती है कुपोषण की दर 10 प्रतिशत से कम
रायपुर, 13 मार्च। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 27वीं कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार-नारी शक्ति के सरोकार' विषय पर राज्य में महिलाओं को दी जा रही सुविधाओं ,सुरक्षा शिक्षा और रोजगार पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होने राज्य में कुपोषण की समस्या के नियंत्रण को लेकर बड़ी बात कही। सीएम भूपेश ने अपनी वार्ता के दौरान कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक 2 सालो में राज्य में कुपोषण की दर 9 प्रतिशत तक कम करने में सफलता हासिल की गई है, अब छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर राष्ट्रीय औसत 32.1 प्रतिशत से भी कम हो गई है। उन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा कि यदि हम इसी रफ्तार से काम करें , तो अगले 5 सालो में प्रदेश में कुपोषण की दर को इकाई में ला सकते हैं ,यानि 10 प्रतिशत से कम कर सकते हैं।

लोकवाणी के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारे पुरखों की वजह से हमें ऐसा संविधान मिला है, जिसमें महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है। हमारे संस्कार और प्रयासों का ही नतीजा है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं का प्रतिशत, देश की अन्य विधानसभाओं की तुलना में सबसे ज्यादा है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में भी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। भूमि और संपत्ति पर कानून के अनुसार महिलाओं को समान स्वामित्व और नियंत्रण का अधिकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने ऐसे कई नीतिगत इंतजाम किए हैं, जिसमें महिलाओं को अचल संपत्ति पर अधिकार मिले।
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अचल संपत्ति का पंजीयन महिलाओं के नाम पर कराए जाने पर स्टाम्प शुल्क में 1 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान किया गया है, जिसके कारण एक वर्ष में 50 हजार से अधिक पंजीयन हुए और 37 करोड़ रुपए से अधिक की छूट उन्हें मिली। सरकारी पदों में भर्ती के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा महिलाओं को दी गई है। महिला छात्रावास तथा आश्रमों में महिला होम गार्ड के 2 हजार 200 नए पदों का सृजन किया गया है। प्रदेश के 370 थानों में महिला हेल्प डेस्क संचालित किए जा रहे हैं। महिला हेल्पलाईन 181 का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश के किसी भी कोने से इस टोल फ्री नंबर 181 पर फोन करके कोई भी महिला सहायता प्राप्त कर सकती है। मैं चाहूंगा कि हमारी बहनें इस 181 नंबर को याद रखें और कोई भी तकलीफ होने पर इसकी मदद लें।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि अब हम प्रत्येक जिले में महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ का गठन करने जा रहे हैं ताकि हमारी माताओं, बहनों को पूर्ण सुरक्षा का वातावरण मिले। जिला खनिज न्यास निधि बोर्ड में ग्रामसभा सदस्य के रूप में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक जिले में महिलाओं के लिए अपना महाविद्यालय हो,इसके लिए हमने 9 जिलों में नए महिला महाविद्यालय शुरू किए हैं।
सीएम भूपेश ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अभी तक 8 हजार 48 गौठान स्थापित किए जा चुके हैं। गौठानों के माध्यम से हमने आजीविका के लिए जो प्रयास किए हैं, उसमें 9 हजार 331 महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 66 हजार से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। इन समूहों ने 65 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार बहुत ही अल्प समय में कर लिया है। गोधन न्याय योजना के तहत भी 45 प्रतिशत से अधिक महिलाएं सीधे भागीदार बनी हैं। गांवों में घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए लगभग 4 हजार बीसी सखियों को जोड़ा गया है।
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मुझे यह कहते हुए खुशी है कि इन बीसी सखियों ने 455 करोड़ रुपए का लेनदेन किया है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत हमने एक वर्ष में 18 करोड़ 41 लाख मानव दिवस रोजगार देकर शत-प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति की है, जिसमें 50 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को मिला है।छत्तीसगढ़ में बेटियों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट तक निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में बेटियों के लिए 30 प्रतिशत पद आरक्षित है। अनुसूचित क्षेत्र में जिला काडर के लिए योग्यताएं शिथिल की गई हैं। अब तो हमने कनिष्ठ सेवा चयन बोर्ड गठित कर दिया है, जो 14 जिलों में स्थानीय लोगों की भर्ती सुनिश्चित कर रहा है।
महतारी जतन योजना' के माध्यम से 1 लाख 71 हजार गर्भवती बहनों को गर्म भोजन तथा रेडी-टू-ईट, टेक होम राशन दिया जा रहा है। कोरोना के समय में भी हमने आंगनवाड़ी केन्द्र के हितग्राहियों को रेडी-टू-ईट फूड दिया। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि 'मैंने मुख्यमंत्री का पद संभाला था तो बताया गया कि वर्ष 2018 में राज्य में कुपोषण की दर 40 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बहुत ही भयावह था। कुपोषण का मतलब नई पीढ़ियों की कमजोर बुनियाद। इसलिए हमने 'मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान' की शुरुआत की।
अभी एन.एफ.एच.एस. 5 के आंकड़े आए हैं, जो बताते हैं कि अब छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर 31.3 प्रतिशत है। अर्थात लगभग 2 वर्षों में हमने कुपोषण की दर 9 प्रतिशत तक कम करने में सफलता हासिल की है। इस तरह अब छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर राष्ट्रीय औसत 32.1 प्रतिशत से भी कम हो गई है। यदि हम इसी रफ्तार से काम करें तो आगामी 5 वर्षों में प्रदेश में कुपोषण की दर को इकाई में ला सकते हैं। अर्थात 10 प्रतिशत से कम कर सकते हैं। इस अभियान के कारण 1 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषण से तथा 1 लाख से अधिक महिलाएं, एनीमिया से बाहर आई हैं और स्वस्थ जीवन जी रही हैं।












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